• जय नारायण बिस्सा 

बीकानेर। संभाग की सबसे बड़े अस्पताल में अंधेर नगरी चौपट राजा वाले हालात बने हुए यहां सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी भ्रष्टाचार चरम पर है। बताया जा रहा है कि अस्पताल में इलाज में कोताही की शिकायतें तो आम है,यहां सरकार की योजनाएं भी दम तोड़ रही है। मजे की बात ये है कि पीबीएम में ब्लैक लिस्टेड फर्मों के भरोसे कामकाज हो रहा है। जानकारी मिली है कि यहां संविदा पर लगे कम्प्यूटर ऑपरेटर की वास्तविक संख्या न तो प्रशासन के पास है और न ही मेडिकल कॉलेज प्राचार्य के पास।

हालात ये बने है कि जिन तीन फर्मों के पास इस कार्य का ठेका है उनमें से एक का संचालक तो पहले से ही ब्लैक लिस्टेड है। जबकि एक को काम सही तरीके से नहीं करने पर तीन जनवरी तक का नोटिस दिया हुआ है। तीसरी फर्म भी विवादों के घेरे में है। सूत्र बताते है कि इन फर्मों के माध्यम से पीबीएम के अनेक अनुभागों में काम कर रहे 152 संविदाकर्मियों का ही अधिकृत रिकार्ड पीबीएम के पास है। इसमें से भी कई तो ऐसे है जो फर्म संचालकों के रिश्तेदार है,जो तय पात्रता को भी पूरी नहीं कर रहे है। ऐसी जानकारी मिली है कि जहां कम्प्यूटर वर्ग में नेटवर्किग का काम नहीं है। वहां ऐसे लोगों को बिठा रखा है। जिनको आरोग्यम के जरिये वेतन दिया जा रहा है। ये कार्मिक नई जनाना अस्पताल,टीबी,न्यूरो जैसे अस्पतालों में सेवाएं दे रहे है।

यहीं नहीं एक फर्म तो ऐसी है,जिसने आईटी सैल में सांठगांठ करके मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना का रोजाना चढ़ाया जाने वाला रिकार्ड भी अब तक नहीं भेजा है। ये काम पिछले दो से तीन महिनों से बाधित है। फिर भी आईटी सैल की मेहरबानी से रिकार्ड में यहां कम्प्यूटर ऑपरेटर काम पर दिखाये गये है।

कहने को 152,काम कर रहे अधिक
जब हमारे संवाददाता ने आईटी सैल हैड से जानकारी ली तो उन्होंने 152 कम्प्यूटर ऑपरेटर लगे होने की बात कही। ये ऑपरेटर आयोग्यम में अपनी सेवाएं दे रहे है। इसके अलावा भामाशाह,मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना,विभाग स्तर पर प्रयोगशालाएं,अस्पताल के कार्यालयों,पर्ची ठेका आदि में भी क म्प्यूटर कर्मी संविदा पर लगे है। इनमें कुछ आरोग्यम से और कुछ फर्मों के दबाव में लगाये गये है। इसके अलावा डीडीसी,वेयर हाउस,सब स्टोर्स,लिपिकों के पास लगे कार्मिक किन के अधीन काम कर रहे है। ये पता ही नहीं है।

कोई जिम्मेदारी तय नहीं
मजे की बात ये है कि तीन फर्मों की ओर से लगाये गये चहेते संविदाकर्मियों को उन जगहों पर फिट किया गया है,जहां नेट नहीं चल रहा। हालात ये है कि इन कार्मिकों की कोई जिम्मेदारी तय नहीं है। मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना में गलत पर्चियां चढ़ाने की शिकायतें इसी का परिणाम है। मंजर ये है कि योग्यता की बात करने वाले आईटी सैल हैड को यह जानकारी भी नहीं है।

हाजरी में भी गड़बड़ी
पूर्व संभागीय आयुक्त सुवालाल ने नियमित व संविदा पर लगे सभी कार्मिकों की हाजरी बायोमेट्रिे्रक हाजरी से उपस्थिति दर्ज करने के आदेश दिये थे। लेकिन पीबीएम प्रशासन की मिली भगती से न तो संविदा पर लगे कार्मिकों और न ही नियमित कार्मिकों की हाजरी बायोमैट्रिक से हो रही है। जिससे फर्मों के माध्यम से लगे संविदाकर्मियों का ठेकेदार शोषण करते है और उनकी रजिस्ट्रर में हाजरी लेकर वेतन में लेट लतीफी तथा कम वेतन देते है।

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