तेजकरण हर्ष
बीकानेर। महारानी की गौरव यात्रा का आगाज लोगों का गौरव मिटाकर हुआ। महारानी शहर में क्या आई बीकानेर वाशिंदे विशेष कर पुष्करणा स्टेडियम के ईद-गिर्द रहने वाले नगरवासी घरों में नजरबंद कर दिए गए। खौफ का मंजर तो देखिये, लोगों ने अपने घरों के बाहर ताले जडकर तखतियां लगा दी है कि हमारे घर आज कोई ना आए। वर्ना पुलिसिया चाबूक चल सकता है। क्या वाई ये लोकतंत्र है या ये सामंती अराजकता की एक बू।

बीकानेरवासी कभी भी खौफजदा जिंदगी नहीं जी, है। चाहे सामंतशाही ही क्यों न थी हम बेबाक और स्वतंत्र विचार रखने में कभी पीछे नहीं रहे। यही कारण था कि बीकानेर के लोगों को यहां के शासकों ने लाल फौज की संज्ञा देकर स्वतंत्र विचार रखने से कभी नहीं रोका, लेकिन गुरुवार को गौरव यात्रा की तैयारी ने पुष्करणा स्टेडियम से लगे तमाम क्षेत्र एक अजीब सी घुटन और पहरे में कहीं कैद हो गया। लोग खुली सांस न ले पाने को मजबूर हो गए वहीं घर के बरामदों से भी झांकना कहीं दूर की कौड़ी थी। जहां लोग दिनभर अपनों की खैर-खबर लेते और मिलते-जुलते नजर आते है वहां एक संन्नाटा पसरा हुआ दिखा मानो हमने अपना गौरव कहीं कैद ना करवा दिया हो।

खाकी का जमावड़ा और घरों पर लगे ताले और उस पर चिपकी चिट साफ जता रही है कि हमारी ही सेवा के लिए चुने गए सेवक आज हमें ही घुटन भरे वातावरण में दुबक कर रहने को मजबूर कर रहे है।
इसका नतीजा यह हुआ कि प्रशासनिक अधिकारी जिनमें पब्लिक की सहायता व सेवा का जज्बा होना चाहिए वे खौफ उन्हीं को डरा रहे है। क्या हम एक बार फिर सामंतशाही की ओर तो नहीं जा रहे है! क्या यह हमारा मानवधिकार हनन तो नहीं है! जन नेता कहलवाने वाले ये सामंतशाही सोच के आका अगर इतने ही खौफ जदा है तो बजाय हमें कैद करने के अपने आपको ही महलों में समित क्यों नहीं कर लेते। हमने वो दौर देखा है जब इज्जत और प्यार नेताओं को दिल से दी जाती थी और आज छिनने के प्रयास किए जा रहे है। हमें विचार तो करना ही होगा कि क्या हमें ऐसे सामंती विचार के लोग चाहिए जो अपने लिए गए निर्णयों एवं कार्यों के जनता के मन में व्याप्त रोष का विरोध भी सहने की क्षमता नहीं रखते। अगर यही सच्चाई है तो ऐसे नेताओं को राजनीति छोड़ देना ही उचित रहता है। साहब ये लोकतंत्र है यहां विचार का विरोध, मतभेद, रोष व बेबाक टिप्पणियों को सहर्ष स्वीकार किया जाना चाहिए और अपने को आईना दिखाने वालों की कद्र होनी चाहिए ना कि दण्ड की आचार संहिताओं से डरा कर उनका गला घोट दिया जाए।

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