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नोखा,पुखराज शर्मा (हैलो बीकानेर)। विधानसभा चुनाव में भाजपा कांग्रेस की उन सीटों पर फोकस ज्यादा कर रही है, जहां से बीजेपी प्रत्याशी दो-तीन बार से हार रहे हैं। ऐसी सीटों को जीतने के लिए पार्टी ने बड़ी रणनीति तैयार की है। बीजेपी के लिए हमेशा से ही मुश्किल में रही ऐसी सीटों को फतह करने के लिए पार्टी जातीय समीकरण पर ध्यान दे रही है। ऐसी ही एक सीट है बीकानेर की नोखा, जहां से रामेश्वर डूडी विधायक है और नेता प्रतिपक्ष भी।

लगातार दो चुनाव में भाजपा यहां से ना केवल बुरी तरह से हार रही है, बल्कि भाजपा प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहता है। दो बार से विश्नोई समाज से पार्टी ने सहीराम व बिहारी लाल विश्नोई को उम्मीदवार बनाया, लेकिन दोनों ही बार हार गए। ऐसे में पार्टी अब दूसरी जाति को मौका देने के मूड में है। रामेश्वर डूडी को शिकस्त देने के लिए इस बार पार्टी किसी जाट या राजपूत को चुनावी मैदान में उतारने के मूड में है। हालांकि चर्चा ज्यादा राजपूत प्रत्याशी की है। डूडी जाट समाज में लोकप्रिय है। अगर भाजपा ने जाट प्रत्याशी उतारा तो जाट बराबर बंट जाएंगे, इसमें संदेह जताया जा रहा है। क्योंकि डूडी की जाट समाज में काफी पैठ है और समाज भी कांग्रेस से जुड़ाव ज्यादा रखता है। जाट और विश्नोई के बाद सर्वाधिक वोट राजपूत समाज के है। राजपूत समाज के नेता भी काफी दावेदारी कर रहे हैं। पश्चिमी राजस्थान में राजपूत समाज भाजपा से काफी नाराज चल रहा है। ऐसे में पार्टी नोखा सीट से किसी राजपूत को टिकट देकर समाज को साधने की कोशिश करेगा। आनन्दपाल एनकाउंटर के बाद बीकानेर, चुरु, नागौर व झुंझुनूं के राजपूत समाज ने काफी आंदोलन किया था। बीजेपी के खिलाफ मूवमेंट भी इन्हीं जिलों में ज्यादा एक्टिव है। भाजपा राजपूत को टिकट देकर समाज की नाराजगी को दूर करने की कोशिश करेंगी, वहीं राजपूत समाज को टिकट देने से ब्राह्मण, वैश्य, एससी वर्ग भी भाजपा के पक्ष में आ सकता है। नोखा में कन्हैया लाल झंवर के निर्दलीय खड़े होने से ब्राह्मण, वैश्य व एससी का बड़ा तबका उनके साथ चला जाता है और भाजपा को करारी शिकस्त झेलनी पड़ती रही है। कन्हैया लाल झंवर इस बार भी निर्दलीय चुनावी मैदान में है और वे पिछली बार दूसरे स्थान पर रहे थे। इससे पहले चुनाव जीतकर संसदीय सचिव रह चुके हैं। भाजपा नेताओं का मानना है कि राजपूत प्रत्याशी पर दांव खेलने पर बनिया,ब्राह्मण कन्हैया लाल झंवर का साथ छोड़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो पार्टी डूडी को कड़ी टक्कर दे पाएंगी।

प्रताप सिंह राठौड़ (पीम्पासर) और मेघ सिंह दे सकते हैं टक्कर


नोखा सीट से कांग्रेस की तरफ से रामेश्वर डूडी को टिकट मिलना तय है। भाजपा से बिहारी लाल विश्नोई, नोखा प्रधान कन्हैया लाल सियाग, युवा नेता प्रताप सिंह राठौड़ (पीम्पासर) और पूर्व सरपंच मेघ सिंह राठौड़ के नाम की काफी चर्चा है। जाट समाज से कन्हैया लाल का नाम प्रमुखता से उठ रहा है तो राजपूत समाज से प्रताप सिंह राठौड़ (पीम्पासर) और मेघ सिंह राठौड़ तगड़े दावेदार है।  प्रताप सिंह राठौड़ युवाओं में काफी लोकप्रिय है। प्रताप सिंह राठौड़ एक साधारण किसान परिवार से है, यह किसान , गांव, गरीब , वंचित , शोषित , पीड़ित , बेरोजगार ,व आम आदमी की बहुत ही अच्छी समझ है ,साथ ही उच्च शिक्षित हैं ,एम कॉम , बीएड ,एल एल बी , पत्रकारिता में स्नातक एवं स्नातकोत्तर हैं , ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं ,जबरदस्त पकड़ हैं, साथ पिछले 10 वर्षों से भाजपा  में अलग अलग संगठन में दायित्व को निभाते आ रहे हैं , बाल्यकाल से आरएसएस के स्वंय सेवक हैं , राजपूत समाज मे अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा युवा प्रदेसाउपाध्यक्ष का दायित्व निभा रहे हैं , भाजपा युवा मोर्चा में 10 वर्ष तक जिलाउपाध्यक्ष का दायित्व निभाया हैं अगर विश्नोई समाज से पार्टी ने टिकट दिया तो बिहारी लाल सबसे अधिक एक्टिव है।

यह है जातीय समीकरण
नोखा सीट पर जाट सर्वाधिक है, जो करीब पचास हजार से अधिक है। इतने ही मेघवाल, नायक व दूसरी एससी जातियां है। विश्नोई और राजपूत तीस-तीस हजार है तो बनिया ब्राह्मण करीब चालीस हजार है।