बीकानेर। आपणी हथाई एवं आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय यूथ फैस्टिवल के द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश गोपाल कृष्ण व्यास ने अपने उद्बोधन में युवाओं को अनुशासन, संयम एवं सहजता पर जीवन यापन करने की सलाह दी।
अपने जीवन के कई संस्मरण सुनाते हुए व्यास ने कहा कि यही तीन मूल मंत्र है जिस पर चलकर मनुष्य अपने जीवन की सभी उच्चाईयों को पा सकता है। व्यास ने कहा कि बीकानेर मेरी जन्मभूमि है एवं मुझे इतना लगाव है कि मैं यहां से कभी जाना पसंद ही नहीं करूंगा, लेकिन मजबूरी में मुझे इस देव धरती को छोड़कर जोधपुर प्रवास करना पड़ा। अपने शुरुआती जीवन संघर्ष को बखान करते हुए बताया कि किस तरह से घण्टों लाईन में लगकर करोसीन लेने से लेकर वकालात की पढ़ाई फिर मुकदमें लडऩा व फिर अपने जीवन के मूल लक्ष्य जज की कुर्सी पर पहुंचना व बड़े-बड़े मुकदमें में फैसला सुनाते हुए अपनी सेवाओं से सेवानिवृत होना शामिल है।
उन्होंने युवाओं को आह्वान किया कि उनको सदेव सूर्य उदय से पूर्व उठाना चाहिए एवं अपने लक्ष्य को निर्धारित कर जीवन में आगे बढ़ते रहना चाहिए। अपने गुरु पंडित लक्ष्मीनारायण पुरोहित को याद करते हुए उन्होंने बताया कि गुरु व मातृ पिता का मनुष्य के जीवन में एक अहम किरदार होता है व मनुष्य अगर धैर्य पूर्वक उनके बताए गए मार्ग पर चलकर उनके आदर्शों का अनुसरण करते तो जीवन की हर ऊचाईयों को पा सकता है।
वहीं द्वितीय सत्र में बीएसएफ के डीआईजी यशवंत सिंह ने मनुष्य के जीवन में अनुशासन की बहुत ही बड़ी अहमियत बताई साथ ही उन्होंने कहा कि अगर आप अनुशासित है एवं जो आपका दिल सही समझता हो उच्च मार्ग में आगे बढ़ते जाए। अपने जीवन का संस्मरण सुनाते हुए डीआईजी यशवंत सिंह ने बताया कि अनुशासन मनुष्य को हर परिस्थिति से डटकर मुकाबला करने में सहयोगी होता है। वहीं उन्होंने यूथ फैस्टिवल के प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए सवालों के भी जवाब दिए। जो कि युवाओं को बहुत रास आए व अपने जीवन के लिए उन्होंने एक अनमोल मार्ग दर्शन की तरह माना।
तृतीय व अंतिम सत्र में हास्य कलाकार सूरतगढ़ मूल के ख्याली ने मनोरंजक अंदाज में युवाओं को जीवन दर्शन का परिचय दिया। ख्याली ने कहा कि युवा अगर मन में ठान ले तो किसी भी विकट परिस्थितियों में गुजरते हुए अपने मुकाम तक पहुंच सकता है। ख्याली ने बताया कि मनुष्य को सदा खुश रहना चाहिए और जीवन के हर पल से हास्य ढूंढ निकालना चाहिए। अपने शुरुआती दौर के संघर्ष का बखान करते हुए ख्याली ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर रात गुजारने से लेकर फैक्ट्री में मजदूरी व घर परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने अपना मुकाम हासिल किया।
कार्यक्रम का समापन बीकानेर के महापौर नारायण चौपड़ा, उद्योगपति बसंत नौलखा, पत्रकार लूणकरण छाजेड़ ने किया। यूथ फैस्टिवल का संचालन बी.डी. हर्ष ने किया। दिनभर के तीनों सत्र में बीकानेर के कई गणमान्य लोग शामिल हुए। आपणी हथाई टीम के सदस्य बलदेव रंगा, एडवोकेट मुकुंद व्यास, मनोजरतन व्यास व गिरिश श्रीमाली ने सभी युवा प्रतिभागियों और आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान का आभार व्यक्त किया।