बीकानेर। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय का 16वां दीक्षांत समारोह शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में सम्पन्न हुआ। इस दौरान कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने 678 विद्यार्थियों को स्नातक, 18 स्नातकोत्तर तथा 5 विद्यार्थियों को विद्या वाचस्पति की उपाधियां प्रदान की। समारोह के दौरान पांच विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक तथा दो विद्यार्थियों को चौधरी चरण सिंह प्रतिभा पुरस्कार भी प्रदान किए गए।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य विभाग मंत्री श्री लाल चंद कटारिया थे। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति का रास्ता खेत और खलिहान से होकर गुजरता है। ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसका खेती से सरोकार नहीं हो। इसी भावना को ध्यान रखते हुए कृषि वैज्ञानिक खेती की नई तकनीकें इजाद कर रहे हैं और इनका लाभ किसान तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री की मंशा भी यही है कि किसान समृद्ध और सशक्त हो। इसे ध्यान रखते हुए सरकार ने बजट में किसानों के हित की अनेक घोषणाएं की हैं।
श्री कटारिया ने कहा कि स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय देशभर में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। यहां से शिक्षा प्राप्त कृषि वैज्ञानिक कृषि क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समारोह में दीक्षा प्राप्त करने वाले कृषि विद्यार्थी भी इन्हीं पदचिह्नों पर चलें और विश्वविद्यालय का नाम रोशन करें। उन्होंने विश्वविद्यालय में बरसाती जल संग्रहण की संरचना विकसित करने, किसानों को जागरुक करने के लिए गांवों को गोद लेकर, इन क्षेत्रों में नियमित गतिविधियां चलाने तथा खाद्य पदार्थों के मूल्य संवर्धन की संभावनाओं के मद्देनजर कार्य करने को कहा।
अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद उच्च शिक्षा, राजस्व एवं उपनिवेशन राज्यमंत्री श्री भंवरसिंह भाटी ने कहा एक समय देश खाद्य पदार्थों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था, लेकिन आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। आज हम खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हैं। यह कृषि वैज्ञानिकों के अनुसंधान और किसानों की मेहनत की बदौलत संभव हुआ है। उन्होंने भविष्य में आने वाले भीषण जलसंकट के प्रति आगाह किया तथा कहा कि हमें पानी की कीमत समझनी होगी। कृषि वैज्ञानिकों को कम पानी वाली फसलांे के लिए अनुसंधान करने की सलाह दी तथा बागवानी खेती को बढ़ावा देने का आह्वान भी किया।
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान सरकार, किसानों के हितों के लिए कृत संकल्प है। मुख्यमंत्री की पहल पर प्रदेश में एक हजार करोड़ रुपये के किसान कल्याण कोष बनाया गया है। प्रदेश मंे पहली बार एक साथ कृषि और उच्च शिक्षा के पचास महाविद्यालय खोले जा रहे हैं। सभी महाविद्यालय इसी सत्र में प्रारम्भ हो जाएंगे। इससे कृषि व उच्च शिक्षा को नए आयाम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने बजट में 75 हजार नई नौकरियां देने की घोषणा की है। इसमें कृषि क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर मिलेंगे। उन्होंने जैविक खेती अपनाने का सुझाव दिया तथा इसके लाभ बताए।
विश्वविद्यालय के बोम सदस्य तथा हनुमानगढ़ विधायक श्री विनोद कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय को कौशल एवं उद्यमिता विकास की दिशा में भी काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों से निपटने में विद्यार्थियों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। इसे समझते हुए विद्यार्थी, देश और प्रदेश के विकास में अपनी भागीदारी निभाएं। चौधरी ने खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की आवश्यकता पर जोर दिया।
दीक्षांत अतिथि के रूप में बोलते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल के सदस्य प्रो. ए. के. श्रीवास्तव ने कहा कि आज जनसंख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को भोजन उपलब्ध करवाना सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के परिपेक्ष्य में यह चुनौती और गंभीर है, क्योंकि यहां जनसंख्या के मुकाबले में जल उपलब्धता बेहद कम है। ऐसे में हमें खेती के नए तरीके इजाफ करने होंगे।
ज्ञान एवं नेशनल इनोवेशन फाउण्डेशन के संस्थापक पद्मश्री प्रो. अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि कृषि विद्यार्थी, उद्यमी बनें तथा खाद्यान्न के मूल्य सवंर्धित उत्पादों को दूर तक पहुंचाए। उन्होंने कहा कि सरकार भी ऐसा मंच बनाए, जो निवेश, उद्यम और नवसृजन को जोड़ने का काम करें।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने कहा कि कृषि शिक्षा पूर्ण करने वाले विद्यार्थी, किसानों के उत्थान के लिए कार्य करें। उन्होंने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि शिक्षा, प्रसार एवं अनुसंधान के क्षेत्र में सतत कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कल्याण सिंह के संदेश का पठन भी किया।
इससे पहले दीक्षांत परेड के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई। इसमें अतिथियों के अलावा एकेडमिक काउंसिल एवं बोम सदस्यों ने भागीदारी निभाई। अतिथियों ने दीप प्रज्जवलन किया। विश्वविद्यालय के कुलगीत और दीक्षांत वंदन प्रस्तुत किया गया। कुलपति ने दीक्षांत समारोह प्रारम्भ करने की घोषणा की। इसके बाद विद्यार्थियों को उपाधियां एवं पदक प्रदान किए गए।
इन्हें मिले स्वर्ण पदक एवं विद्यावाचस्पति की उपाधियां
अतिथियों द्वारा शिवभगवान, कुमारी प्रीति निराडी पी, कुमारी सिंधु, कुमारी काजल राणा तथा गोपाल लाल धाकड़ को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। वहीं गोपाल लाल धाकड़ को कुलाधिपति पदक प्रदान किया गया। इसी प्रकार प्रमोद कुमार कुमावत, कुमारी विद्या भाटी, कुमारी वनिका भुंवाल, रामधन धसवा तथा शीशराम ढीकवाल को विद्या वाचस्पति की उपाधियां प्रदान की गई। अतिथियों द्वारा कुमारी सिंधु एवं कुमारी सुचित्रा को चौधरी चरण सिंह प्रतिभा पुरस्कार से नवाजा गया। अतिथियों ने अनुसंधान निदेशालय द्वारा प्रकाशित साहित्य का विमोचन भी किया।
समारोह में कुलसचिव प्रो. राजेश शर्मा सहित विश्वविद्यालय के डीन-डायरेक्टर, शैक्षणिक-अशैक्षणिक स्टाफ सदस्य, राजुवास-आइसीएसआर संस्थानों के प्रतिनिधि, विद्यार्थी मौजूद रहे।
कन्या छात्रावास का लोकार्पण
इससे पूर्व कृषि मंत्री श्री लालचंद कटारिया, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्री भंवर सिंह भाटी, विधायक श्री विनोद कुमार तथा कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने गृह विज्ञान परिसर में बने आइएबीएम के कन्या छात्रावास का लोकार्पण किया। इस दौरान अतिथियों ने छात्रावास का अवलोकन किया तथा व्यवस्थाओं को सराहा। कुलपति प्रो. शर्मा ने बताया कि आइएसीएस मद से लगभग 2 करोड़ की लागत से इस छात्रावास भवन का निर्माण करवाया गया है। इसमें 44 कक्ष हैं तथा सभी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं।