पुस्तक ‘‘पाटा परम्परा एवं परिवर्तन’’ का हुआ लोकार्पण

बीकानेर। समाजशास्त्री डॉ राजेन्द्र जोशी की पुस्तक ‘‘पाटा परम्परा एवं परिवर्तन’’ का लोकापर्ण समारोह श्री जैन कन्या महाविधालय के सभागार मे सम्पन्न हुआ। समारोह मेे दीप प्रज्जवलन व मॉ सरस्वती की प्रतिभा पर माल्यापर्ण अतिथियो द्वारा किया गया। लोकापर्ण समारोह के मुख्य अतिथि माननीय कुलपतिप्रो. भागीरथ सिंह, महाराजागंगासिंह विष्वविधालय बीकानेर, विषिष्ठ अतिथि शिवराज छंगाणी व जानकी नारायण श्रीमाली व समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार और कंेन्दीय साहित्य अकादमी मे राजस्थानी भाषा के संयोजक मधुजी आचार्य का संस्था अध्यक्ष विजय कुमार जी कोचर, सचिव नरेन्द्र जी कोचर, आचार्य डॉ संध्या सक्सेना, डॉ अशोक शर्मा ने माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया, समारोह के संयोजक डॉ आनन्द सिंह बीठू ने स्वागत भाषण द्वारा सभी अतिथियो का अभिनन्दन किया तत्पष्चात् पुस्तक कालोकार्पण अतिथियो और राजपरिवार के सदस्य नरेन्द्रसिंह जी बीका, विजय कुमार कोचर, नरेन्द्र कोचर और लेखक डॉराजेन्द्र जोषी द्वारा किया गया, लेखक डॉ जोषी ने लेखकिय वक्तव्य मे कहा कि पाटा एक हजार संस्कृतियो का संरक्षक और पुरोधा है, लेखक ने अपनी प्रथम पुस्तक अपने भ्राता गिरिराज जोषी और भाभी को भेट की।

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पुस्तक की समीक्षा श्रीहरिषंकर आचार्य सुचना व जनसंपर्क अधिकारी द्वारा कि गई, उन्होने कहा कि यह पुस्तक षहर कि तमाम परंपराओ और लघु संस्कृतियो का संकलन होने के साथ साथ इस षहर कि आत्माको समझने की एक समाजषास्त्रीय दृष्टि प्रदान करने मे सफल हुई है। पुस्तक समीक्षक ने पुस्तक के सभी अध्यायो का सुक्ष्म तटस्थ निरिक्षण प्रस्तुत किया। विषिष्ट अतिथि जानकीनारायण श्रीमाली ने कहा कि पाटा परम्पंरा बीकानेर स्थापना के साथ गांवो से आई और यहा के सामाजिक एवं सांस्कृति जीवन का अभिन्न अंग बन गई, विषिष्ट षिवराज जी छंगाणी ने कहा कि डॉ जोषी की पुस्तक से हमारी पाटा परम्पंरा न केवल लिखित इतिहास का अभिन्न अंग बनेगी बल्कि भावी पीढ़ियो के लिए अपनी संस्कृति को जानने का दर्पण सिद्ध होगी, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो.भागीरथ सिंह ने कहा कि यह पुस्तक इस षहर के बाहर के लोगो को पाटा और पाटा परम्पंरा को जानने और समझने मे सहायक सिद्ध होगी और यहा के जन जीवन, प्राचीन परम्पंराओ पर नये अनुसंधान के लिए संदर्भ ग्रंथ का कार्य करेगी उन्होने लेखक से पुस्तक मे ओर अधिक अन्वेषण कर षीघ्र हीन ये संस्करण को निकालने कि इच्छा व्यक्त की । समारोह अध्यक्ष मधुआचार्य ने डॉ राजेन्द्र जोषी को साधुवाद देते हुए कहा कि संस्कृति पर लेखन का कार्य जोखिम से कम नही होता है लेकिन आपने न केवल इस जोखिम को उठाया बल्कि पाटा परम्पंरा जैसे जटिल विषय पर अन्वेषण कर के पाटो कि जीवतंता को कलम द्वारा रेखित करने का कार्य किया है। इस दौरान अतिथियो का पुरूषोत्तम जी भादाणी, डॉ चन्द्रषेखर श्रीमाली कमलरंगा, बुलाकी षर्मा, डॉ राजषेखर पुरोहित, महादेव आचार्य द्वारा सॉल औढाकर और स्मृति चिन्ह देकर अभिनन्दन किया गया, पुस्तक समीक्षक श्रीहरिषंकर आचार्य को नरेन्द्रसिंह जी बीका ने तथा कार्यक्रम संचालक हरिषबी षर्मा को डॉ रजनीरमण झां ने स्मृति चिन्ह भेट किया। और अंत मे कार्यक्रम के समन्वयक अनुराग हर्ष ने धन्यवाद ज्ञापित किया।कार्यक्रम का संचालन श्री हरिष बी षर्मा द्वारा किया गया। इस लोकापर्ण समारोह में बीकानेर के षिक्षाजगत के षिक्षाविदो उप षिक्षा अधिकारी सुनिल बोड़ा, षिवषंकरचौधरी, आनन्दहर्ष और महाविधालय के व्याख्यातागण, साहित्यकारो मे डॉ गौरिषंकरप्रजापत, नमामी षंकर व्यास, लोकसंस्कृति के अनुरागियोव गणमान्य लोग उपस्थित हुए।

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