left

हैलो बीकानेर। भारत ही नहीं, विश्व पर्यटन मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले राजस्थान के गणगौर महोत्सव की कुछ अलग ही पहचान है। बीकानेर के बिन्नाणी चौक में दयाल महाराज ओझा के घर पिछले 10 सालों से गणगौर की गोठ का आयोजन होता आ रहा है। इस आयोजन में मौहल्ले और रिश्तेदारों की गणगौर को एक स्थान पर एकत्रित कर गोठ का आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम को आयोजित करने वाले सिताराम ओझा ने बताया कि गणगौर गोठ महोत्सव में मौहल्ले व रिश्तेदारों की गणगौर उनके घर आती है और कुंवारी लड़कियां व शादीशुदा महिलाएं विभिन्न प्रकार के व्यंजनों मां गणगौर को भोग लगाया जाता है तथा गणगौर गीत का आयोजन किया जाता है।

”परब पावणो आयो, सगळो ने घणो सुवायों,

दिन गवरियों रो आयो, चौ तरफों आनंद छायोंÓÓ

जैसे गीतों की प्रस्तुतियों से गणगौर गोठ कार्यक्रम की शुरूवात की गई। इस साल के गणगौर गोठ कार्यक्रम में लक्ष्मी, पूजा, आरती, ज्योती, परी, आयूषी, रानी, संतोष, सीना, मिना, श्यामा, विनिता, शोभा, छोटी देवी,  रेखा , राखी, शांती देवी, मूली देवी, सरस्वती देवी, जेठा देवी, मिकू, पिकू आदि ने अपने-अपने गीतों व नृत्य की प्रस्तुति दी। इस कार्यक्रम में अर्जुन, मदन, पखुराज, मंगलचंद, सूरज, योगेश और गणेश ने अपनी महत्वपूर्ण भुमिका निभाई।

गणगौर महिलाओं का उत्सव माना जाता है। कुंवारी लड़कियां मनपसंद वर की कामना करती करती है तो विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की कामना करती है।

फोटो जर्नलिस्ट : राहुल व्यास