राजुवास के श्रेष्ठ स्नातकोत्तर को मिलेगा कुलाधिपति स्वर्ण पदक विद्यार्थियों के लिए “साइबर क्राइम” पाठ्यक्रम होगा शुरूः कुलपति प्रो. गहलोत
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बीकानेर, । वेटरनरी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परिषद् की दसवीं बैठक शनिवार को कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत की अध्यक्षता में आयोजित की गई जिसमें छात्रों के व्यापक हित में लिए गए फैसलों को लागू किया गया। प्रो. गहलोत ने बताया कि डिजिटल इन्डिया, डिजिटल कैश पेमेन्ट सहित इन्टरनेट और मोबाइल पर बढ़ती शैक्षणिक गतिविधियों के मद्देनजर विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए विश्वविद्यालय में“साइबर क्राइम” का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि दैनिक जीवन में साइबर की उपयोगिता को देखते हुए पशुचिकित्सा शिक्षा के स्नातक स्तर के प्रथम वर्ष में नए सत्र में यह पाठ्यक्रम लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि सामाजिक सराकारों के मद्देनजर पर्यावरण विज्ञान विषय और युवाओं में कौशल विकास के पाठ्यक्रम भी प्रारम्भ किये गए हैं। अकादमिक परिषद् ने प्रत्येक वर्ष की स्नातकोत्तर परीक्षा में विश्वविद्यालय में प्रथम आने वाले एक विद्यार्थी को राज्यपाल गोल्ड मेडल प्रदान करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की गई। राजुवास में उत्कृष्ट शैक्षणिक कार्य और प्रदर्शन करने वाले एक-एक विद्यार्थी और शिक्षक को भी वर्ष का पुरस्कार देकर सम्मानित और प्रोत्साहित किया जाएगा। राज्यपाल महोदय के निर्देशानुसार शिक्षकों की व्यावसायिक कुशलता बढ़ाने के लिए रिफ्रेसर पाठ्यक्रमों में शिरकत करवायी जाएगी। सभी शिक्षकों का रोस्टर तय करके ऐसे प्रशिक्षणों में भेजा जाएगा। कुलपति प्रो. गहलोत ने बताया कि वेटरनरी विश्वविद्यालय के शैक्षणिक स्तर और उपलब्धियों के कारण बाहृय विश्वविद्यालयों के मेधावी छात्र-छात्राओं का रूझान बढ़ा है। राजुवास की पाठ्यक्रम पुनरावलोकन समिति की सिफारिशों को भी मंजूरी प्रदान की गई। राजुवास के बीकानेर, जयपुर और नवानियां (उदयपुर) के परिसरों में पशुचिकित्सा शिक्षा में स्नातक, स्नातकोत्तर, पशुपालन डिप्लोमा और कौशल विकास के चार स्तरीय पाठ्यक्रम लागू किये गए हैं। परिषद् ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् द्वारा प्रस्तावित पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान स्नातक पाठ्यक्रम की न्यूनतम अर्हताओं का अनुमोदन किया। राजस्थान सरकार द्वारा दो वर्षीय पशुपालन डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए निर्धारित नए मापदण्डों और संस्थान की सम्बद्धता के नियमों का भी अनुमोदन कर दिया गया। अकादमिक परिषद् ने अलवर और बूंदी जिले में निजी क्षेत्र में एक-एक नए पशुपालन डिप्लोमा संस्थानों को भी स्वीकृति प्रदान कर दी। राज्य में राजकीय और निजी क्षेत्र में 68 संस्थान पशुपालन डिप्लोमा पाठ्यक्रम चल रहे हैं। बैठक में 9वीं अकादमिक परिषद् की कार्यवाही विवरण का अनुमोदन किया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री बी.आर. मीणा, वित्त नियंत्रक श्री अरविन्द बिश्नोई, स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, जयपुर तथा वेटरनरी कॉलेज नवानियां (उदयपुर) के अधिष्ठाता, विश्वविद्यालय के डीन-डायरेक्टर और अकादमिक परिषद् के मनोनीत सदस्य सहित पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. ओ.पी. किलानियां मौजूद थे।