संजय लीला भंसाली के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘पद्मावती’ पर विरोध के स्वर हर दिन तेज होते जा रहे हैं. वहीं, इस मामले पर विरोध करने वाले सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर कर फिल्म पर रोक लगाने की मांग कर चुके हैं. एेसा एक महीने में एक-दो बार नहीं तीन बार हो चुका है.

आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने विरोधियों को जमकर फटकार लगाते हुए विरोध में स्वर तेज करने वाले मुख्‍यमंत्रियों को भी आड़े हाथों लिया है. कोर्ट ने सुनवार्इ के दौरान कहा कि फिल्‍म को देखे बिना सार्वजनिक कार्यालयों में बैठे लोगों का ऐसे मुद्दों पर टिप्पणी करना सही नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर बिना फिल्म देखे जिम्मेदार पद पर बैठे लोग इसको लेकर बयान क्यों दे रहे हैं? उनका बोलना सेंसर बोर्ड के दिमाग में पक्षपात पैदा करेगा.

कोर्ट ने कहा कि अगर कोई ऐसा करता है तो वो कानून के राज्य के सिद्धांत का उल्लंघन करेगा. इन लोगों को ये बात दिमाग में रखनी चाहिए कि हम कानून के राज्य के तहत शासित होते हैं. जब सीबीएफसी के पास मामला लंबित हो तो जिम्मेदार लोगों को कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि सेंसर बोर्ड विधान के तहत काम करता है और कोई उसे नहीं बता सकता कि कैसे काम करना है. हमें उम्मीद है कि सब संबंधित लोग कानून का पालन करेंगे.

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