मांगलिक गीतों की सीडी का वितरण शुरु

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बीकानेर। भारतीय संस्कृति में मानव जीवन के सोलह संस्कार माने जाते हैं। इन सोलह संस्कारों में विवाह जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार है। भारतीय संस्कृति और धर्म में विवाह को लेकर बहुत सी व्यवस्थाएं हैं जिनका पालन किया जाना चाहिए। मांगलिक गीतों का भी विवाह संस्कार में महत्वपूर्ण स्थान है। इसी उद्देश्य, भावना को लेकर पुष्करणा ब्राह्मण परिषद संस्था के युवा प्रकोष्ठ द्वारा विशेष रुप से पुष्करणा सावा-2017 के मौके पर डिजिटलाईजेशन वैवाहिक गीतों की सीडी तैयार की गयी जिसे रविवार से वितरण शुरु कर दिया गया। रविवार को नत्थूसर गेट के अंदर पुष्करणा ब्राह्मण परिषद संस्था के कार्यालय में संरक्षक पं. जुगल किशोर ओझा (पूजारी बाबा), संयोजक राजेश चूरा, शिवनारायण पुरोहित (सीन महाराज) के सानिध्य में सीडी का वितरण शुरु हुआ। इस अवसर पर पं. राजेंद्र किराडू, सुशील किराडू, रामचन्द्र व्यास, लल्लू महाराज, शिवकुमार व्यास, भंवर पुरोहित, श्यामदेव किराडू, मदन जैरी, युवा प्रकोष्ठ के राजेश आचार्य, स्नेहप्रकाश व्यास, एडवोकेट धर्मेन्द्र, कमल कुमार सहित अनेक मौजूद रहे। युवा प्रकोष्ठ के अश्विनी व्यास ने बताया कि पूर्व न्यायाधीश डी.एन. जोशी को भी वैवाहिक मांगलिक गीतों की सीडी भेंट की गई। उधर रतना महाराज ने बताया कि परिषद संस्था के कार्यालय में विवाह का कार्ड जमा करवाकर खिडकिया पाग नि:शुल्क प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 31 जनवरी को पाग दूल्हे के सिर के हिसाब से नि:शुल्क प्राप्त की जा सकती है। इस सम्बन्ध में पुष्करणा ब्राह्मण परिषद संस्था के प्रदेशाध्यक्ष महेश व्यास का कहना है कि नववधू जब घर में प्रवेश करती है तो मंगल गीतों से उसका स्वागत होता है और विवाह से पूर्व भी नववधू के मायके तथा वर के घर में गीत गाए जाते हैं। इन गीतों का संबंध ज्योतिष के परिपेक्ष में घर की नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करना मंगल गान व साजों की ध्वनि से सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाना है। महेश व्यास ने कहा कि कहा कि आधुनिक भाग-दौड़ भरी जिंदगी के कारण है परंतु फि र भी कुछ आयोजन मांगलिक गीतों के साथ ही किए जाएं तो उसका सम्बन्ध अध्यात्म से होता है, एक जुड़ाव रहता है।