राजस्थान में विधानसभा उपचुनावों में कांग्रेस का रहा दबदबा

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जयपुर hellobikaner.com राजस्थान में आगामी पांच दिसम्बर को चुरु जिले की सरदारशहर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले प्रदेश में करीब सौ उपचुनाव हो चुके हैं और इनमें आधे से ज्यादा बार कांग्रेस ने बाजी मारी और वर्तमान में सत्तारुढ़ कांग्रेस के पिछले चार वर्ष के शासन में हुए सात उपचुनाव में भी कांग्रेस ने पांच पर जीत हासिल कर अपना दबदबा रखा।

 


राज्य निर्वाचन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 1955 से अब तक राज्य में 96 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हो चुके हैं जिनमें सर्वाधिक 56 बार कांग्रेस ने जीत हासिल कर इन उपचुनावों में अपना दबादबा बनाया जबकि वर्ष 1980 में अस्तित्व में आई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन चुनावों में 22 बार विजयी हासिल की। कांग्रेस ने इन चुनावों में पिछले करीब 77 वर्षों में 56 बार जीत हासिल की जबकि भाजपा ने 42 वर्षों में 22 बार उपचुनाव जीता।

 


राज्य में अब तक हुए विधानसभा उपचुनावों में एक वर्ष में सर्वाधिक उपचुनाव वर्ष 1955 में 17 विधानसभा क्षेत्रों में हुए जिनमें कांग्रेस ने लगभग एकतरफा 15 सीटों पर जीत हासिल कर इन चुनावों में अपना जोरदार दबदबा कायम किया जबकि एक सीट पर पीएसपी एवं एक अन्य उम्मीदवार ने जीत दर्ज की।

 


इन उपचुनावों में निर्दलीयों का बहुत कम प्रतिनिधित्व रहा और केवल तीन निर्दलीय ही इस दौरान उपचुनाव जीत पाये। इनमें वर्ष 1965 में हनुमानगढ़ जिले के नोहर विधानसभा सीट पर दयाराम, वर्ष 1991 में भरतपुर जिले के डीग में अरुण सिंह और वर्ष 2000 में चुरु जिले के सादुलपुर में नंदलाल पूनियां शामिल हैं। इनके अलावा इन उपचुनावों में जेएनी ने तीन बार, बीजेएस और एनसी (जे) पार्टी ने दो-दो बार जबकि जनता दल, रालोपा, पीएसपी, एसडब्ल्यूटी, सीपीएम, सीपीआई एवं एसएसपी ने एक-एक बार जीत दर्ज की।

 


राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के शासन में पिछले चार वर्षों में तीन उपचुनावों में मंडावा, खींवसर, सुजनागढ़, सहारा, राजसमंद, वल्लभनगर एवं धरियावद विधानसभा सीटों पर सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए, जिनमें राजसमंद और खींवसर को छोड़कर शेष पांचों स्थानों पर कांग्रेस प्रत्याशी जीता जबकि राजसमंद में भाजपा एवं खींवसर में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के उम्मीदवार ने जीत हासिल की। इन उपचुनावों के बाद सरदारशहर से विधायक पंडित भंवरलाल शर्मा के निधन के बाद रिक्त हुई सीट पर आगामी पांच दिसंबर को उपचुनाव हो रहा हैं और इसके लिए सत्तारुढ़ कांग्रेस और विपक्ष भाजपा के उम्मीदवार के बीच कड़ी टक्कर होने की उम्मीद हैं लेकिन रालोपा भी अपना उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारकर पूरा जोर लगा रही जिससे मुकाबला त्रिकोणीय भी हो सकता है।

 


गत चार वर्ष में हुए उपचुनाव में कांग्रेस को मिली जीत से उत्साहित  गहलोत ने सरदारशहर उपचुनाव के लिए पार्टी प्रत्याशी के नामांकन के दिन ही दावा करते हुए कहा था कि पिछले चार वर्षों में राज्य में ऐतिहासिक योजनाएं लाकर कई जनकल्याणकारी काम किए गए हैं और किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रखने से इस उपचुनाव में कोई सत्ता विरोधी लहर कहीं नजर नहीं आ रही हैं, इस कारण यह उपचुनाव भी कांग्रेस प्रत्याशी जीतेगा। उधर भाजपा भी अपने उम्मीदवार की जीत का दावा कर रही हैं।