आय में वृद्धि के लिये होता रहा मृतक का इलाज

0


कोलकाता। आपने गब्बर इज बैक फिल्म का वो दृश्य तो देखा ही होगा जिसमें एक नामी अस्पताल मृतक को ही भर्ती कर लेता है और उसे आइसीयू में भर्ती कर दो दिनों बाद मृत घोषित करके लाखों रुपये की बिल थमा देता है। महानगर कोलकाता में भी इसी से मिलती-जुलती घटना की पुनरावृत्ति हुई हैा

मामला गोर्की टेरेस के पार्क क्लिनिक की है। आरोप है कि यहां भर्ती बुजुर्ग की एक दिन पहले ही मृत्यु हो जाने के बावजूद अस्पताल की ओर से परिजनों को सूचना नहीं दी गई और बिल बढ़ाने के लिए शव को भी वेंटिलेटर पर रखा गया। मृतक की पहचान अमित चटर्जी (79) के रूप में हुई है।

ye betiyaanअमित की बेटी स्मिता ने आरोप लगाया है कि उनके पिता की मौत एक दिन पहले ही हो जाने के बाद भी अस्पताल की ओर से उन्हें कुछ भी नहीं बताया गया और बिल बढ़ाने के लिए उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। 29 मई की देर रात उन्हें फोन करके कहा गया कि पिता की मौत हो गई है। स्मिता ने दावा किया है कि सूचना मिलने के बाद भवानीपुर स्थित अपने घर से आधे घंटे के भीतर अस्पताल में पहुंच गई थी लेकिन जब पिता को छुआ तो वे वर्फ से भी अधिक ठंडे हो गए थे।

उन्होंने दावा किया कि केवल आधे घंटे में शरीर का इतना ठंडा होना संभव नहीं था। स्मिता ने दावा किया है कि उनके पिता की मृत्यु पहले ही हो गई थी लेकिन उन्हें बर्फ की मदद से अस्पताल ने कहीं रख दिया था। इतना ही नहीं स्मिता का कहना है कि उनके पिता को डॉ. संदीप चटर्जी और डॉ. सुजाता मजुमदार की देखरेख में गत 13 मई को भर्ती करवाया था। 17 दिनों तक इसी अस्पताल में उनका इलाज हुआ लेकिन मौत के बाद उनके डेथ सर्टिफिकेट पर डॉ. सुजाता मजुमदार ने लिखा ‘ दी रीयल काज ऑफ डेथ इज अननोन, इट कैन बी डिटेक्टेड ऑनली बाई पोस्टमार्टम (अज्ञात वजहों से मौत हुई है, पोस्मार्टम के बाद ही असली वजह का पता चल सकेगा।)’ इस वजह से अमित का पोस्टमार्टम भी करना पड़ गया है।

स्मिता ने सवाल उठाया है कि आखिर जिस अस्पताल ने 17 दिनों तक इलाज किया वहां से डेथ सर्टिफिकेट पर ऐसा कैसे लिखा जा सकता है कि अज्ञात वजहों से मौत हुई है। वह अस्पताल और डॉ. सुजाता के खिलाफ कानूनी कदम उठाएंगी।

अस्पताल की लापरवाही का आलम यहीं नहीं थमा है। उन्हें जो लाखों रुपये का बिल थमाया गया है उसमें भी बड़ी धांधली का आरोप स्मिता ने लगाया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल के बिल में बताया गया है कि केवल 36 घंटे के अंदर अमित को 37 बोतल ग्लूकोज चढ़ाया गया है। एक 79 साल के वृद्ध के शरीर में एक घंटे से भी कम समय में एक बोतल पानी लगातार 36 घंटे तक चढ़ाना संभव नहीं है।

बिल के बदले रोक दिया था शव

स्मिता ने आरोप लगाया है कि ने उनके पिता का शव रोक दिया था। प्रबंधन की ओर से कह दिया गया था कि जब तक वे पूरा बिल नहीं देंगी, पिता का शव उन्हें नहीं सौंपा जाएगा। हालांकि बाद में जब बात मीडिया में पहुंची तब जाकर अस्पताल ने अमित के शव को दिया है।

स्वास्थ्य विभाग में करेंगी शिकायत: स्मिता ने कहा है कि उनके पिता की मौत अस्पताल की लापरवाही और मनमानी की वजह से हुई है। उन्हें जो भी जानकारी अस्पताल की ओर से दी गई है उसमें कहीं दायित्वपूर्वक इलाज की ओर संकेत नहीं है बल्कि केवल रुपये लूटने के लिए हेरफेर किए गए हैं। वह इस मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग में तो करवाएंगी ही साथ ही थाने और जरूरत पड़ने पर कोर्ट में भी याचिका लगाएंगी।

सवालों पर अस्पताल ने साधी चुप्पी:

मृतक अमित की बेटी स्मिता चक्रवर्ती के आरोपों पर प्रतिक्रिया के लिए जब अस्पताल के लैंड लाइन नंबर पर फोन किया गया तो पहले 15 मिनट तक एक विभाग से दूसरे विभाग में फोन ट्रांस्फर होता रहा और अंत में जब आरोपी चिकित्सक डॉ. सुजाता मजुमदार से बात हुई तो उन्होंने बात करने से ही मना कर दिया।

यूनानी चिकित्सा काउंसिल अधिकारियों से पूछताछ

यूनानी इलाज विशेषज्ञ का फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर 20 वर्षो से भी अधिक समय तक बेल-व्यू समेत महानगर के तमाम अस्पतालों में काम कर चुके नरेन पांडेय के मामले में सीआइडी ने अब यूनानी काउंसिल के प्रतिनिधियों से पूछताछ की है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीआइडी की एक विशेष टीम मंगलवार की दोपहर कोलकाता स्थित यूनानी आयुर्वेद के दफ्तर में पहुंची व काउंसिल के अधिकारियों से पूछताछ की। दरअसल नरेन ने बताया है कि उसने रुपये देकर ना सिर्फ अपना बल्कि और भी कई लोगों का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया है। इसी मामले में जांच अधिकारियों ने पूछताछ की है।

साभारः जागरण