सामूहिक विवाह अनुदान योजना की एफडीआर वितरण समारोह आयोजित

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बीकानेर। महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सामूहिक विवाह अनुदान योजना के तहत गत वित्तीय वर्ष में 9 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है। इस वर्ष भी छह करोड़ रूपये अनुदान स्वरूप दिए जा रहे हैं। भदेल सोमवार को किराड़ूओं की बगीची में परशुराम सेवा समिति द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह अनुदान योजना की एफडीआर वितरण समारोह को संबोधित रह रही थीं। पंडित नथमल पुरोहित के सान्निध्य में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वतंत्रता सेनी दाऊ लाल व्यास ने की। इस अवसर पर भदेल ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि विभिन्न योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों को मिले। इसे ध्यान रखते हुए योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुष्करणा समाज का ओलम्पिक सावा, समाज की वर्षों पुरानी परम्परा है। ऐसे आयोजनों से समाज को और अधिक मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि हम धीरे-धीरे अपनी परम्पराओं से दूर होते जा रहे हैं, जो कि चिंताजनक है। महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सामूहिक विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए, सामूहिक विवाह में परिणय सूत्र में बंधने वाले जोड़ों को मुख्यमंत्री के हस्ताक्षरयु?त शुभकामना संदेश दिए जाने की परम्परा शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि हमें विरासत में अत्यंत सुदृढ़ परम्परा एवं संस्कार मिले हैं। विरासत में मिली इस संस्कृति को संजोकर रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को आगे बढ़ाने के लिए कठोर निर्णय लिए हैं। देश हित के निर्णय हैं और आज देश उनके निर्णय के साथ खड़ा है।
फोटो राजेश छंगाणी


भदेल ने कहा कि आज दुनिया हमारी संस्कृति और सभ्यता की ओर देख रही है। परिवार रूपी इकाई, हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमें रिश्तों में मधुरता बनाए रखने की जरूरत है, जिससे संस्कार आने वाली हम हमारी भावी पीढ़ी को दे सकें। उन्होंने परशुराम सेवा समिति द्वारा सामूहिक विवाह के लिए किए गए प्रयासों को सराहनीय बताया और कहा कि दूसरों को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए। डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य ने कहा कि समिति ने पूरी तन्मयता के साथ, समाज के संस्कारों को आगे बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने महिलाओं में घूंघट प्रथा, जैसी कुरीतियों को समाप्त करने का आह््वान किया। अविनाश जोशी ने कहा कि बीकानेर पुष्करणा समाज का सावा 461 वर्ष पुराना है। सावे की तिथि का निर्धारण भी शास्त्रोक्त प्रणाली से होता है। राजेश चूरा ने कहा कि पुष्करणा ब्राह्मण समाज की परम्पराओं का निर्वहन करने वाले परिवारों का सम्मान करना चाहिए, जिससे वे दूसरों के लिए मिसाल बन सकें। ताराचंद सारस्वत ने कहा कि परशुराम सेवा समिति जैसी संस्थाओं के प्रयासों से समाज के संस्कारों को जीवंत बनाए रखने में सहायता मिलती है। परशुराम सेवा समिति के अध्यक्ष नवरत्न व्यास ने परकोटे को छत मानकर, सहायता राशि स्वीकृत किए जाने पर राज्य सरकार का आभार जताया। महापौर नारायण चौपड़ा, पूर्व महापौर भवानी शंकर शर्मा, पार्षद शिवकुमार रंगा सहित अनेक वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ने गत सामूहिक सावे में परिणय सूत्र में बंधी कन्याओं को ग्यारह हजार प्रति जोड़े के हिसाब से अनुदान राशि की एफडीआर सौंपी। कृषि उपज मंडी अध्यक्ष रामचंद्र व्यास, रासबिहारी जोशी, किशन ओझा, सहीराम दुसाद, एडवोकेट कमल नारायण पुरोहित, महिला अधिकारिता की मेघा रतन मंच पर मौजूद थीं। इस अवसर पर विजय आचार्य, कन्हैया लाल जोशी, पार्षद नरेश जोशी, शिवकुमार रंगा, गिरिराज जोशी, दूलीचंद सेवग, होलसेल भंडार के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र व्यास, शंकर पुरोहित, दिलीप जोशी, सुनीता गौड़, रूप किशोर व्यास, मोहन किराड़ू, भंवर पुरोहित, सुशील किराड़ू सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन हरीश बी. शर्मा ने किया।
फोटो राजेश छंगाणी