योगाचार्य शंकर लाल सैनी द्वारा जनता को नीमगिलोय का निःशुल्क वितरण

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चूरू, पर्यावरण प्रेमी शंकरलाल सैनी द्वारा मौसम से बचाव के लिए नीमगिलोय वितरण करत




हैलो बीकानेर न्यूज नेटवर्क, चूरू, जगदीश सोनी , hellobikaner.com शेखावाटी क्षेत्र के जाने माने योगाचार्य, वृक्ष मित्र व पर्यावरण प्रेमी शंकरलाल सैनी सर्दी के मौसम से बचाव के लिए नीमगिलोय का निःशुल्क वितरण कर एक अद्भुत मिसाल पेश कर रहे हैं। इसके अलावा योगाचार्य शंकरलाल सैनी बारिश के मौसम में तुलसी, अश्वगंधा, शतावरी, मीठा नीम आदि आयुर्वेदिक औषधि के पौधे तथा बिल्वपत्र, नीम, खेजड़ी आदि छायादार पौधे भी आमजन में निःशुल्क वितरित करते हैं।

 

 

 

तथा गत वर्ष कोरोनाकाल में भी इन्होंने अपने घर की बगीया में लगी हुई नीमगिलोय खूब मात्रा में निशुल्क वितरित की। सर्दी के मौसम में आमजन में सर्दी जनित खांसी, जुकाम, एलर्जी व बुखार आदि रोगों की सम्भावना अधिक रहती है।

 

 

 

इन रोगों से बचने के लिए आयुर्वेद में तुलसी, नीमगिलोय, अदरक, काली मिर्च, लौंग व दालचीनी आदि का काढा बनाकर पीने का विधान बताया गया है। गिलोय में एंटीपायरेटिक गुण होते हैं, जो बुखार को जल्द ठीक करने में मदद करते हैं और इम्युनिटी बूस्टर की तरह काम करते हैं। गिलोय का काढ़ा पीने से फोड़े-फुंसी, रक्त विकार और अनेक तरह के चर्म रोग दूर हो सकते हैं।

 

 

इसके अलावा गिलोय का सेवन त्वचा संबंधी रोगों और एलर्जी से बचाव करता है। रतननगर के वार्ड नंबर 10 के निवासी योगाचार्य व पर्यावरण प्रेमी शंकरलाल सैनी पिछले कुछ वर्षों से न केवल लोगों को निशुल्क योग का अभ्यास करवा रहे हैं, बल्कि 100 से अधिक पौधों की एक छोटी सी बगिया लगाकर आमजन को दूषित पर्यावरण प्रदूषण से बचाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। पर्यावरण की दिशा में वह उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।

 

 

 

न केवल पेड़ पौधों को लगाते हैं बल्कि सर्दी व गर्मी में उनकी पूर्ण सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाते हैं। पौधों को प्राचीन तकनीक से जूट या कपड़े के सुरक्षा कवच से ढ़ककर बचाने का सराहनीय कार्य करते हैं तथा यह तकनीक आमजन को भी बता रहे हैं ताकि पौधे सुरक्षित रहें। योगाचार्य व पर्यावरण प्रेमी शंकरलाल सैनी ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, जीव, जलवायु, इन पांच चीजों को बचाना जरूरी है। यदि ये नहीं बचे तो मानव जीवन खतरे में आ जाएगा।