किसान चौपाल में मिली उन्नत कृषि की जानकारी

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हैलो बीकानेर न्यूज नेटवर्क, चूरू, मदनमोहन आचार्य , hellobikaner.comकृषि विज्ञान केन्द्र पोकरण ने बुधवार को रामदेवरा पंचायत के ग्राम मावा में किसान चौपाल लगाई। चौपाल में केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के साथ सवांद के माध्यम से खेती एवं पशुपालन से जुडी विभिन्न समस्यों एवं इनके उचित समाधान पर चर्चा की।

 

 

 

कार्यक्रम में केंद्र के सस्य वैज्ञानिक कृष्ण गोपाल व्यास ने किसानों को रबी फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन पर जानकारी दी। इन्होने किसानों को रस चूसक कीटों जैसे एफिड, जैसिड इत्यादि की रोकथाम के लिए कीटनाशी इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. दवा 1 मिलीलीटर प्रति 3 लीटर पानी या डाइमिथोएट 30 ई. सी. दवा 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिडकाव करने की सलाह दी।

 

 

 

साथ ही इन्होने बताया कि जीरे में 35 दिन के बाद 60 और 85 दिन पर सिंचाई करने और सरसों में भी बुवाई के क्रमश: 35, 60, 75, 85 एवं 105 दिनों पर सिंचाई का ध्यान रखने की सलाह दी।

 

 

इसके अतिरिक्त सरसों में लौकीमुला अर्थात औरोबैंकी खरपतवार की समस्या के लिए सावधानीपूर्वक ग्लाईफोसेट के दो छिड़काव करने की सिफारिश के बारे में अवगत कराते हुए बताया की इस दवा का प्रथम छिडकाव बुवाई के 25 दिन बाद जिसमे 25 ग्राम दवा प्रति हैक्टेयर तथा दूसरा छिडकाव 55 दिन बाद 50 ग्राम दवा प्रति हैक्टेयर के हिसाब से एक प्रतिशत अमोनियम सल्फेट के साथ करना चाहिए।

 

 

 

चौपाल में केन्द्र के कृषि वैज्ञानिक सुनील शर्मा ने एक जिला एक उत्पाद कार्यक्रम में चयनित खेजडी के क्षेत्रफल को बढ़ावा देने के लिए इसकी उन्नत किस्म थार शोभा के पौधे खेत की सीमा पर चारो ओर लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया।

 

 

 

इन्होने बताया कि पौधों से सांगरी एवं पशुओं के लिए पोषणयुक्त हरा चारा लूँग प्राप्त होगी साथ में खरीफ़ फसलों को लू के प्रकोप से बचाया जा सकेगा। थार शोभा किस्म की विशेषताओं की चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि पौधे की लंम्बाई 8-10 फ़ीट तक होती है। और इसमें कांटे भी नहीं होते है। थारशोभा खेजड़ी में दो साल बाद ही फलियाँ लगनी शुरू हो जाती है।

 

 

 

थारशोभा किस्म के पौधे पर सांगरी पतली आती है जो बाजार में सबसे महँगी बिकती है। एक पौधे पर 20 से 30 किलो तक सांगरी आ सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कम्पोस्ट एवं वर्मी कम्पोस्ट बनाकर इसके खेत में इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर कन्हैयालाल, रेखराज, नारायणलाल, बालाराम, लालचंद, जानकीलाल, घनश्याम सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।