जैन पंचांग का लोकार्पण व सम्मान समारोह

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बीकानेर गंगाशहर,। समाजिक मर्यादाएं कोई कानून नहीं बल्कि कानून से बढ़कर है। यह बात आज जैन महासभा द्वारा पंचांग 2017 के लोकार्पण एवं सम्मान समारोह को सम्बोधित करते हुए आषीर्वाद भवन में मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ. टी. के. जैन ने कही। उन्होंने कहा कि शादी, विवाह, अन्य सामाजिक, पारिवारिक आयोजन मेल मिलाप समाज में प्रेम और सांमजस्य बढ़ाने के अवसर होते है। इन अवसरों का आयोजन बहुत ही शालीनता और मर्यादा से होना चाहिए, उन्होंने कहा कि आजकल देखा-देखी में अपव्यय की मानसिकता बढ़ रही है जिसको रोकना समाज की जिम्मेदारी है ताकि समाज अपनी पहचान बनाये रखे। जैन महासभा के नेतृत्व में समाज के सभी घटकों ने मिलकर इसी बीमारी का इलाज करने के लिए 21 व्यंजन की सीमा की मर्यादा तय की है, जिसको अपनाना हर उस व्यक्ति के लिए जरूरी है जो इस का अंग है। प्रोफेसर जैन ने कहा कि मर्यादाओं में षिथिलता किसी भी समाज के लिए घुन की तरह होती है जो उस समाज के अस्तित्व को ही खतरे में डाल सकती है।
समारोह तीन चरणों में सम्पन्न हुआ प्रथम चरण में जैन पंचांग का लोकार्पण महावीर रांका स्वागतध्यक्ष विनोद बाफना, जैन महासभा के पूर्व अध्यक्ष इन्द्रमल सुराणा, विजय कोचर, चम्पकमल सुराणा व वर्तमान अध्यक्ष जयचन्द लाल डागा व महामंत्री जतनलाल दूगड़ व जैन लूणकरण छाजेड़ ने किया। पंचांग के बारे में जानकारी देते हुए जतन दूगड़ ने कहा कि पंचांग में तिथि, दिनांक, आयोजन, त्यौंहार, सूर्योदय, नवकार, पोरसी, दूगडि़या, चौघडि़या, पक्खी, संवत्सरी इत्यादि के साथ ही जैन धर्म के सभी घटकों के सभी पर्वों व तीर्थकरों के पंचकल्याणक की जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि 21 व्यंजन सीमा अभियान की घर-घर जानकारी रहे इसमें इस पंचांग की विषेष भूमिका है। जैन महासभा के अध्यक्ष जयचन्द लाल डागा ने कहा कि समाज में सादगीपूर्ण आयोजनों हेतु जैन समाज के प्रत्येक व्यक्ति को 21 व्यंजन सीमा अभियान के अनुरूप् संकल्पित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्षन व आडम्बर जहां आध्यात्मिक रूप से उचित नहीं है वहीं व्यवहार रूप से भी इससे समाज में ईर्ष्या व होड़ बढ़ती है जो उचित नहीं है। संजय सांड ने कहा कि जिस प्रकार तेरापंथ भवन व सज्जन निवास में आयोजकों को 21 व्यंजन से अधिक बनाना वर्जित है उसी प्रकार समाज के व जैन समाज के किसी व्यक्ति द्वारा संचालित अतिथि भवनों में भी यह निष्चित करना चाहिए कि शादी विवाह, गृहप्रवेष, जन्मोत्सव आदि अवसरों पर 21 व्यंजन से ज्यादा बनाने वालों को भवन उपलब्ध नहीं होगा। इससे आडम्बर व प्रदर्षन पर रोक लगेगी।
समारोह का विषय परिवर्तन करते हुए जैन लूणकरण छाजेड़ ने कहा कि सामाजिक सुधार के लिए अपनाये जाने वाले इन तरीकों से विचार भिन्न हो सकते है परन्तु प्रदर्षन,फैषन, दहेज, बड़े भोज की सीमा कहीं न कहीं तो बांधनी होगी। सामाजिक सुधार तब तक प्रभावी नहीं होंगे, जब तक उपदेष देने वाले स्वयं व्यवहार में नहीं लायेंगे। छाजेड़ ने कहा सुधार के नाम पर जब तक लोग अपनी नेतागिरी, अपना वर्चस्व व जनाधार बनाने में लगे रहेंगे तब तक लक्ष्य की सफलता संदिग्ध है। भाषण और कलम घिसने से सुधार नहीं होता। सुधार भी दान की भांति घर से शुरू होता है, यह स्वीकृत सत्य है और जैन महासभा के पदाधिकारियों ने अपने घरों से इसकी शुरूआत की है।
21 व्यंजन सीमा अभियान को अपनाने वाले सैकड़ो लोगों को मोतियों की माला पहनाकर व सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
महावीर रांका के नगर विकास न्यास का चैयरमेन मनोनीत होने व जयचन्द लाल डागा के श्री अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के अध्यक्ष बनने पर जैन महासभा से चम्पकमल सुराणा, तपःगच्छ से विजय कोचर, खतरगच्छ से घेवरचन्द मुसरफ, पार्ष्वचन्द्र सुरी से तनसुखदास बांठिया, साधुमार्गी जैन संघ बीकानेर से राजेन्द्र गोलछा, भीनासर-गंगाषहर से डंूगरमल सेठिया, शान्त-क्रान्त संघ से इन्द्रमल सुराणा, हुक्मगच्छीय से गुलाब दफतरी, अरिहन्त मार्गी जैन संघ से जयचन्द लाल सुखाणी, तेरापंथी सभा, बीकानेर से सुरपत बोथरा, भीनासर से महेन्द्र बैद एवं गंगाषहर से मनोज सेठिया, दिगम्बर प्रबन्धन समिति ट्रस्ट से विनोद जैन एडवोकेट ने अभिनन्दन करते हुए बधाईयां दी तथा सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं प्रदान की। इस अवसर पर प्रो. सुमेर चन्द जैन, कन्हैयालाल बोथरा व शान्ति विजय सिपानी ने भी अपनी मंगल कामनाएं व्यक्त की। महावीर रांका को जयचन्दलाल डागा, भीखमचन्द, धनपत व सुरेष बाफना ने रजत श्रीफल भेंट किया। रांका का परिचय हेमनत सींगी ने दिया, माल्यार्पण मनोहर नाहटा, पताका जिनेन्द्र जैन व साफा सुरेन्द्र जैन, शॉल इन्दुचन्द बांठिया ने भेंट किया। अभिनन्दन पत्र का वाचन सुषील बैद ने किया व एडवोकेट विनोद जैन ने रांका को अभिनन्दन पत्र भेंट किया। जयचन्द लाल डागा का अभिनन्दन करते हुए परिचय मेघराज बोथरा ने किया। माल्यार्पण दुलीचन्द बुच्चा, पताका मनीष बाफना, साफा जसकरण छाजेड़, शॉल लूणकरण बोथरा ने, अभिनन्दन पत्र का वाचन सी.ए. माणक कोचर ने व जेठमल बोथरा ने अभिनन्दन पत्र भेंट किया।
विनोद बाफना को शॉल जयचन्दलाल डागा व विजय कोचर ने पताका चम्पकमल सुराणा व माला इन्द्रमल सुराणा ने पहनााकर बहुमान किया।


महावीर रांका ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि शहर के सर्वांगीण विकास में भरपूर प्रयास करते रहेंगे। उन्होंने समाज के सभी वर्गो से सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि विवाह समारोह में दोनों पक्ष मिलकर एक ही आयोजन करें जिससे मितव्यता होगी एवं अपव्यय नहीं होगा। रांका ने कहा कि 21 व्यंजन सीमा अभियान बहुत अच्छा अभियान है, सभी लोगों को अपनाना चाहिए। उन्होंने जैन महासभा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतने अभिनन्दन समारोह हुए परन्तु इतना बड़ा व स्नेह से भरा अभिनन्दन समारोह से मैं अभिभूत हूं व अपने आप को गौरान्वित महसूस करता हूं।
खचाखच भरा हॉल उस वक्त तालियों से गूंजायमान हो गया जब श्रीमती राजादेवी डागा ने जयचन्द लाल डागा को व ममता रांका ने महावीर रांका को मोतियों की माला पहनाकर अभिनन्दन समारोह की शुरूआत की। जनता की मांग पर रांका व डागा ने अपनी-अपनी धर्मपत्नियों को भी मोतियों की माला पहनाकर अपनी सफलता का श्रेय देते हुए अभिनन्दन किया।
नापासर के महेष्वरी समाज द्वारा महेष्वरी समाज में 21 व्यंजन सीमा अभियान लागू करने पर बीकानेर के जैन समाज ने अभिनन्दन पत्र भेंट करके व माला पहनाकर अध्यक्ष दामोदर झंवर, श्याम जी करनाणी एवं अन्य पदाधिकारियों का अभिनन्दन किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के पर्यवेक्षक प्रोफेसर डॉ. नृसिंह बिन्नाणी ने कहा कि जैन, माहेष्वरी समाज की तरह सभी समाज अपने यहां आडम्बर व प्रदर्षन को रोकने के लिए 21 व्यंजन सीमा अभियान लागू करे। प्रो. बिन्नाणी ने आज के कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रषंसा करते हुए इस तरह के आयोजनो की आवष्यकता बताई।
समारोह का शुभारम्भ सामूहिक नवकार मंत्र के उच्चारण से हुआ। तेरापंथ महिला मण्डल ने महावीर अष्टकम्, समता बहू मण्डल ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। समारोह में बैठने के लिए जगह कम पड़ गई अतः देर से पहुंचे गणमान्य लोगों को खड़ा रहना पड़ा। आभार ज्ञापन विनोद बाफना ने किया तथा संचालन जैन लूणकरण छाजेड़ ने किया।