कथारंग का हुआ जन-अनावरण, किताबें खरीदकर आमजन शामिल हुए लोकार्पण की प्रक्रिया में

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– धरणीधर पर बीकानेर साहित्य महोत्सव संपन्न, हर वर्ष होगा आयोजन
– कहानी को आम जन तक पहुंचाने का लक्ष्य, कविता का आस्वादन और कहानीकारों का सम्मान

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हैलो बीकानेर। बीकानेर साहित्य महोत्सव का आयोजन शनिवार को स्थानीय धरणीधर रंगमंच पर हुआ। इस अवसर पर साहित्य और पाठकों के बीच को दूरी कम करने तथा ‘जन तक सृजनÓ पहुंचाने के लिए संवाद हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत बीकानेर के 150 रचनाकारों के कहानी संग्रह ‘कथारंगÓ तथा मेहनत और लगन से व्यावसायिक ऊंचाइयां छूने वाले लोगों के जीवन-संघर्ष पर आधारित कृति ‘हुनर और हौसले की कहानियांÓ के जन-अनावरण से हुई। इस मौके पर हर वर्ष बीकानेर साहित्य महोत्सव आयोजित करने का भी घोषणा की गई।

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जन-अनावरण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कविता कोश के संस्थापक ललित कुमार ने इस अवसर पर कहा कि आम व्यक्ति तक साहित्य पहुंचे इससे बेहतर तो कोई बात ही नहीं हो सकती क्योंकि पढऩे की आदत जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन कर सकती है। कथारंग की टैग-लाइन ‘जन तक सृजनÓ
उन्होंने भाषा से कटते बच्चों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि आज के समय में भाषा के साथ हो रहे दुव्र्यवहार को बचाना बेहद जरूरी है। ललित कुमार ने बताया कि कविता कोश और गद्य कोश के माध्यम से वैश्विक स्तर पर साहित्य को प्रसारित करने का काम किया जा रहा है, इसी तरह से कथारंग का भी एक प्रयास है और इस तरह के प्रयासों से भाषा और साहित्य ही नहीं समाज का भी हित होगा।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि व्यवसायी कन्हैयालाल बोथरा ने कहा कि साहित्य और कला के साथ-साथ बीकानेर व्यवसाय की दृष्टि से भी काफी उर्वर है और यही वजह हैं कि बीकानेर में व्यवसाय की अपार संभावनाएं हैं। कहानी की किताब के साथ व्यवसायियों के जीवन-संघर्ष पर आधारित यह किताब भी एक मील का पत्थर साबित होगी और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरक किताब साबित होगी।

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अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी रामकिसन आचार्य ने इस बात पर चिंता जताई कि बहुत सारे साहित्यकारों का सृजन प्रकाश में नहीं आ पाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी लेखक का सृजन प्रकाशित हुए बगैर नहीं रहना चाहिए। ऐसे समय में कथारंग का प्रकाशन एक आशा जगाता है।
स्वागताध्यक्ष वरिष्ठ रंगकर्मी-पत्रकार मधु आचार्य ‘आशावादीÓ ने कहा कि कथारंग में दूसरी बार प्रकाशित कहानीकार इस बात के लिए आश्वस्त करते हैं कि उन्होंने कहानी विधा को पूरे मन से स्वीकार किया है। ये रचनाकार हिंदी साहित्य के नक्शे पर निश्चय ही आने वाले समय में बीकानेर का नाम करेंगे। आचार्य ने कहा कि बीकानेर साहित्य महोत्सव का आयोजन अब हर वर्ष होगा।
इस मौके पर ‘कथारंगÓ के संपादक तथा ‘हुनर और हौसले की कहानियांÓ के लेखक हरीश बी.शर्मा ने बताया कि जन-सामान्य से साहित्य का रिश्ता जोडऩे के लिए कथारंग की परियोजना पर काम शुरू किया गया है ताकि लेखकों को पहचान मिल सके और जन-सामान्य को सोचने-समझने के लिए एक दृष्टिकोण मिल सके। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कहानी-लेखन कार्यशाला के आयोजन पर भी किया जाएगा।
स्वागत-वक्तव्य में पत्रकार धीरेंद्र आचार्य ने दिया। आभार पत्रकार अनुराग हर्ष ने जताया। संचालन इंज्लिश गुरु किशोरसिंह राजपुरोहित ने किया। इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार भवानीशंकर व्यास ‘विनोदÓ, श्रीलाल जोशी, शिवराज छंगाणी, डॉ.उमाकांत, डॉ.मोहम्मद हुसैन सुचित्रा कश्यप व डॉ.ब्रजरतन जोशी को सम्मानित किया गया।
दूसरे सत्र में काव्य-जुगलबंदी का आयोजन किया गया जिसमें ओजस्वी कवि-शायर राजेश विद्रोही और आनंद वि.आचार्य ने अपनी काव्य रचनाओं से शमा बांधा। जुगलबंदी का संचालन संजय आचार्य ‘वरुणÓ ने किया। कवियों को वरिष्ठ साहित्यकार भवानीशंकर व्यास विनोद और लक्ष्मीनारायण रंगा ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
समापन सत्र में 150 कहानीकारों का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि पंचायत राज मंत्री राजेंद्रसिंह राठौड़ थे। अध्यक्षता विधायक डॉ.गोपाल जोशी ने की।
मुख्य अतिथि पंचायत राज मंत्री राजेंद्रसिंह राठौड़ ने इस मौके पर कहा कि कहानियां हमारे जन-जीवन से जुड़ी हुई है। बचपन से ही हमें कहानियों से माध्यम से ही सीख और समझ मिलती है। उन्होंने कहा कि बीकानेर में 150 रचनाकारों की कहानियां का संग्रह अपने आप में अनूठा प्रयास है। कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि बीकानेर में इतनी बड़ी संख्या में साहित्यकार जुटे हैं, जिनकी कलम में सृजन है। उन्होंने कहा कि बीकानेर साहित्य महोत्सव हर वर्ष होना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीकानेर विधायक (पश्चिम) डॉ.गोपाल जोशी ने कहा कथारंग जैसे प्रयास सम-सामयिक हैं। इस तरह के आयोजनों से न सिर्फ नव-लेखकों को अवसर मिलता है बल्कि संवाद की भी एक प्रक्रिया शुरू होती है। उन्होंने कहा कि बीकानेर साहित्य महोत्सव के माध्यम से जन तक सृजन पहुंचाने का जो लक्ष्य लिया गया है, वह प्रासंगिक है। जो लिखा जा रहा है, उसे पाठक भी मिलने चाहिए।