सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है मकर संक्रांति

0


कादम्बिनी क्लब द्वारा विचार गोष्ठी और सृजन सम्मान समारोह का आयोजन

हैलो बीकानेर,। सक्रांति का पर्व देश के विभिन्न भागों में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है.यह देश कि सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है.इस पर्व के साथ वैज्ञानिकता जुडी हुई हैं हमारे पूर्वजों ने वैज्ञानिक मान्यताओं को जन जीवन का अंग बनाने के लिए उनको त्योहारों से जोड़ दिया ताकि लोग इनको अपने जीवन में उतार सके .ये विचार सुप्रशिध साहितकार डॉ. उषाकिरण सोनी ने कादम्बिनी क्लब द्वारा स्थानीय होटल मरुधर हेरिटेज के विनायक सभागार में कादम्बिनी क्लब द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी और सृजन सम्मान समारोह में प्रकट किये. डॉ सोनी ने कहा कि मकर संक्रांति पर देश के अधिकाँश भागों में खिचड़ी बना कर खाने का चलन हैं जिसके पीछे वैज्ञानिक धारणा यह है कि इस दिन के बाद लोगों को गरिष्ठ भोजन को छोड़ कर हल्का और उबला हुआ भोजन लेना शुरू कर देना चाहिए. मकर सक्रांति पर विषय विशेषग्य के रूप में बोलते हुए समाजसेवी और साहित्यकार डॉ. सुधा आचार्य ने कहा कि मकर सक्रांति का ज्योतिष से गहरा सम्बन्ध हैं. उन्होंने कहा कि मकर सक्रांति केवल १४ जनवरी को ही नही आती वरन अलग अलग काल में अलग अलग दिनों पर आती रही है यह ज्योतिष गणना पर आधारित हैं. कार्यक्रम के प्रारंभ में क्लब के अध्यक्ष और संयोजक डॉ. अजय जोशी ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि मकर सक्रांति का हमारे सामजिक और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है यह पर्व व्यक्ति और प्रकृति का संगम हैं.यह नव सृजन का प्रतीक है.उन्होंने कादम्बिनी क्लब सृजन सम्मान २०१७ के महत्व और उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला।

mukhya athiti shri Bhawani shankar ji vyas

कार्यक्रम में क्लब के सह संयोजक डॉ नरसिंह बिन्नानी ने स्वामी विवेकानंद कि जयंती को ध्यान में रख कर दिए गये व्याखान में स्वामी विवेकानंद को युवा वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया.उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद युग दृष्टा थे.उन्होंने तत्कालीन पराधीन भरत का मान दुनिया में ऊँचा किया. इस अवसर पर मोहनलाल जांगिड, डॉ प्रकाश चन्द्र वर्मा,आराधना जोशी,नरसिंह भाटी,सरोज भाटी, मंजूर अली चंदानी,शैलेन्द्र सरस्वती, ओम प्रकाश दैया,jay jay चंद सोनी,बाबूलाल छगानी,सुनील कुमार सोनू,ललिता राजपुरोहित,हेमचंद बांठिया सहित कई साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों ने अपने विचार व्यक्त किये।

कार्यक्रम में क्लब के चार सदस्यों डॉ. संजू श्रीमाली के कथा संग्रह ‘औरत का सफरनामा’, श्री राजाराम स्वर्णकार कि व्यक्ति परिचय पर आधारित पुस्तक ‘जिन क़दमों ने रचे रास्ते’, डॉ.कृष्णा आचार्य की पुस्तक ‘वक्त की ठंडी रेत पर’ और डॉ ज़िया उल हसन कादरी की शोध पुस्तक ‘मारवाड़ में उर्दू’ के प्रकाशन के उपलक्ष्य में ‘कादम्बिनी क्लब सृजन सम्मान २०१७’ से नवाज़ा गया. कार्यक्रम के समन्वयक गिरिराज पारीक ने सम्मानित साहित्यकारों का कव्याताम्क परिचय प्रस्तुत किया. सम्मान के बाद लेखकों ने अपनी पुस्तकों का परिचय दिया. लेखकों के सम्मानपत्रों का वाचन श्री असफाक कादरी, अजीत राज ,रंजीता व्यास और बी.डी.हर्ष ने किया।

कार्यक्रम के मुख्य अथिथि के रूप में बोलते हुए कवि,कथाकार और शिविरा पत्रिका के पूर्व सम्पादक श्री भवानी shankar व्यास विनोद ने कहा कि बीकानेर में साहित्य कला और संस्कृति का पूरा माहोल है, क्लब के चार सदस्यों का चार अलग अलग विधाओं में पुस्तकों का लेखन इस बात को सिद्ध करता हैं.उन्होंने कहा कि साहित्य और संस्कृति एक दूसरे के अभिन्न अंग हैं इनको अलग करके नही देखा जाना चाहिए. कार्यक्रम कि अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार लूणकरण छाजेड ने कहा कि पर्व और त्योय्हार व्यक्ति में नई उर्जा का संचार करते हैं यह उर्जा व्यक्ति के सृजन के लिए भी प्रेरित करती हैं.कार्यक्रम का संचालन गिरिराज पारीक और आभार ज्ञापन श्री मोहनलालजांगिड ने किया।