एक हजार एक सौ हस्ताक्षरों से युक्त निवेदन-पत्र सौंपा केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री को

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बीकानेर। राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करवाने हेतु विभिन्न स्थलों पर आयोजित संकल्प-यात्र के सहभागी राजस्थानी समर्थकों के एक हजार एक सौ हस्ताक्षरों से युक्त निवेदन-पत्र राजस्थान मुक्तिनाथ समिति द्वारा माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के लिए केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री भारत सरकार अर्जुनराम मेघवाल को सेवा केंद्र बीकानेर में संकल्प यात्रा के परामर्शक बुलाकी शर्मा, समन्वय मधु आचार्य ‘आशावादी’, संयोजक डॉ. नीरज दइया एवं सचिव राजेन्द्र जोशी ने अनेक राजस्थानी समर्थकों के साथ सौंपते हुए जल्द मान्यता प्रदान करने की मांग दोहराई। प्रधानमंत्री को लिखे निवेदन पत्र में राजस्थानी मान्यता के लिए सभी आवश्यक बिंदुओं का विवरण देते हुए कहा गया है कि मान्यता का पुनीत और ऐतिहासिक कार्य करवाए जाने पर संपूर्ण राजस्थान और राजस्थानी समाज चिरकाल आभारी रहेगा और इस कार्य से सर्वत्र सराहना मिलेगी। इस अवसर पर निवेदन पत्र ग्रहण करते हुए केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री भारत सरकार अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि संकल्प यात्रा का पूरा दस्तावेज और यात्रा में प्रगट जन जन की भावना को माननीय प्रधानमंत्री जी के समक्ष संपूर्ण दस्तावेज के साथ प्रस्तुत करेंगे तथा जल्द मान्यता हेतु प्रयास करेंगे। मेघवाल ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य में हिंदी के उत्थान के लिए पूरा राजस्थान देश के साथ समर्थन में है, अगर क्षेत्रीय भाषाओं का पोषण होगा तो राष्ट्रभाषा हिंदी का भी स्वतः पोषण होगा। बीकानेर की भांति राजस्थानी के लिए ऐसी यात्राएं चलाने से संगठित रूप से जन जन की भावनाएं सामने आएगी। मुक्ति के सचिव कवि-कहानीकार राजेन्द्र जोशी ने बताया कि संकल्प यात्रा के दौरान यात्रा जहां जहां भी पहुंची उसे जन जन का समर्थन मिला है। सभी बीकानेर निवासियों की आकांक्षा है कि राजस्थानी को जल्द मान्यता मिले। इसके लिए उदाहरण के तौर पर पहले चरण के रूप में एक हजार एक सौ हस्ताक्षरों से युक्त ज्ञापन माननीय प्रधानमंत्री जी को राजस्थानी के समर्थक केंद्रीय वित्त मंत्री जी के हाथों भिजवाया जा रहा है इससे आशा की जा सकती है कि हमारी मांग पर जल्द ध्यान दिया जाएगा।

संकल्प यात्रा के परामर्शक कहानीकार-व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि राजस्थान में हिंदी और राजस्थानी दोनों भाषाओं के साथ सभी भारतीय भाषाओं का सम्मान है। कभी भी एक भाषा का दूसरी भाषा से विरोध नहीं होता, भाषाओं का समुच्चय में मातृभाषा राजस्थानी सर्वोपरि है।

संकल्प यात्रा के समन्वय साहित्यकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कि जनगणना के दौरान राजस्थान के निवास वर्षों से मातृभाषा राजस्थानी और राष्ट्रभाषा हिंदी लिखवाते रहे हैं। जो लोग इस सत्य को जानते हुए भी भ्रम पैदा करते हैं वे यह जान लें कि राजस्थानी की मान्यता से हिंदी कमजोर नहीं होगी वरन उसे बल मिलेगा।

संकल्प यात्रा के संयोजक कवि-आलोचक डॉ. नीरज दइया ने कहा कि राजस्थानी भाषा राजस्थानी के निवासियों की अस्मिता के सावाल से जुड़ी है। बिना राजस्थानी के राजस्थान की अवधारणा साकार नहीं हो सकती। हर प्रांत की अपनी भाषा है तो राजस्थान की मातृभाषा की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।

ज्ञापन देने वाले में साहित्यकार नवनीत पाण्डे, मोहन सुराणा, राजाराम स्वर्णकार, मुरलीमनोहर माथुर, जगदीश रत्नू, राहुल रंगा राजस्थानी तथा बड़ी संख्या में राजस्थानी के समर्थक शामिल थे।