आदेश की पालना करे अन्यथा रहे न्यायालय में हाजिर

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(स्वायत शासन विभाग का मामला)

हैलो बीकानेर, जोधपुर,। माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री अरूण भंसाली ने नगर निगम जोधपुर में अधिशाषी अभियंता (सिविल) के पद पर कार्यरत श्री विनोद व्यास द्वारा प्रस्तुत अवमानना याचिका में प्रसंज्ञान लेते हुए आदेश की पालना करने अथवा नही करने पर सचिव स्वायत शासन विभाग को दिनांक 26.05.2017 को न्यायालय के समक्ष व्यक्तिशः उपस्थित रहने का आदेश जारी किये ।
ज्ञात रहे नगर निगम जोधपुर में अधीक्षण अभियंता (सिविल) के पद पर कार्यरत विनोद व्यास की नियुक्ति नगर पालिका सेवा नियम के तहत दिनांक 30.07.1983 में हुई थी । कर्मचारी को स्थायीकरण का लाभ भी वर्ष 1983 से प्रदान कर दिया गया था । उसके पश्चात सेवा में रहते हुए विनोद व्यास ने वर्ष 1986 में अभियांत्रिकी की डिग्री भी प्राप्त कर ली गयी थी लेकिन स्वायत शासन विभाग द्वारा डिग्रीधारी अभियंता की वरिष्ठता सूची में प्रार्थी को उपयुक्त स्थान प्रदान नही करने के कृत्य से व्यथित होकर माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष एक रिट याचिका संख्या 1498/2003 प्रस्तुत की थी ।
उक्त रिट याचिका को दिनांक 16.1.2014 को निस्तारित करते हुए माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय ने प्रार्थी की वरिष्ठता संबधी व्यथा को 6 माह में निस्तारित करने एंव प्रार्थी को डिग्रीधारी अभियंता (सिविल) में उचित स्थान देने एंव उसके अनुसार ही सभी परिणामिक लाभ देने का आदेश पारित किया था।
विभाग द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की पालना लम्बे समय तक नही करने पर याचिकाकर्ता ने अपने अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा के माध्यम से एक अवमानना याचिका माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की । उक्त अवमानना याचिका में विभाग द्वारा आदेश की पालना के लिये समय लेने एंव दिनांक 2.5.2017 को भी विभाग द्वारा पालना हेतु समय मांगने पर एंव विभाग द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश की पालना नही करने के इस कृत्य को गम्भीरतापूर्वक लेते हुए, माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय ने स्वायत शासन विभाग को उच्च न्यायालय के आदेश की पालना के लिये अंतिम अवसर देते हुए यह आदेश पारित किया कि आगामी तारीख पेशी दिनंाक 26.05.2017 तक माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश की पालना की जाये अन्यथा सचिव स्वायत शासन विभाग स्वंय व्यक्तिशः न्यायालय में उपस्थित रहे।