मुंगफली की सरकारी खरीद के लिए किसानों की आम सभा

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श्रीडूंगरगढ। उपखण्‍ड कार्यालय के समक्ष किसान संयुक्‍त संघर्ष समिति की अगुवाई में बडी संख्‍या में किसान एकत्रि‍त हुए तथा एक दिन का समय देकर सरकारी समर्थन मुल्‍य पर मुंगफली की खरीद शुरू करवाने की मांग की। सभा को सम्‍बोधित करते हुए संघर्ष समिति के श्‍याम सुन्‍दर आर्य ने बताया कि बाजार में मुंगफली की फसल समर्थन मुल्‍य से काफी नीचे बिक रही है, सरकार ने मुंगफली का 4400 रूपये प्रति क्विंटल की दर से भाव तय कर रखा है, जबकि बाजार मुंगफली का भाव 3000 से 3500 रूपये के बीच है, जिससे हर किसान को मुंगफली की बेचने से एक लाख से डेढ लाख रूपये का आर्थिक नुकसान हो रहा हैI इस सम्‍बन्‍ध में पिछले डेढ माह में बार – बार सरकार को अवगत करवा रहे है, लेकिन सरकार किसानों की इस गंभीर समस्‍या की तरफ ध्‍यान नहीं दे रही है, अगर सरकार ने इसी तरह संवेदनहीनता दर्शायी तो आगामी दिनो में किसान संयुक्‍त संघर्ष समिति के बैनर तले क्षेत्र के हजारों कि‍सान उग्र प्रदर्शन करेगे ।

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अख‍िल भारतीय किसान सभा के जिलाध्‍यक्ष कॉमरेड गिरधारी महिया ने कहा कि सरकार की गलत नितियों से सबसे ज्‍यादा हमला किसानों पर हुआ है, पिछले एक माह से सरकार को अवगत करवा रहे है, मगर अभी तक खरीद की हलचल भी शुरू नहीं हुई है, इससे लगता है कि सरकार किसानों की समस्‍याओं के प्रति गंभीर नहीं है I इसलिए किसान बचाओं खेती बचाओं का नारा देते हुए आगामी 7 नबम्‍बर को जिला मुख्‍यालय पर किसान महापंचायत करके आर पार की लडाई लडेगे I
वहीं किसानों के मुद्दे पर बोलते हुए एडवोकेट रेवन्‍तमल नैण ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के साथ सौतेला व्‍यवहार कर रही है, एक तरफ कॉरर्पोट लोगों का 1.40 लाख करोड रूपये का कर्जा माफ करके उनके नाम भी उजागर नहीं कर रही है, वहीं किसानों पर बढ रहे कर्जे पर बैक द्वारा कुर्की निकाल कर ढोल बजाये जा रहे है I

इनका क्‍या कहना है . . . . .

प्रदेश की भाजपा सरकार की नितियां किसान विरोधी है, इसी संवेदनहीन सरकार नहीं देखी, किसानों को तय भाव में भी खरीद शुरू करवाने के लिए संघर्ष करना पडा रहा है I
(भरतसिंह राठौड, एडवोकेट)

किसानों को एकजुट होकर संघर्ष तेज करना होगा I
(भागूराम सहू, पूर्व प्रधान)

सरकार एक तो मुंगफली की फसल को समर्थन मुल्‍य पर सरकारी खरीद नहीं कर रही है और बिजली की दरों में 35 प्रति‍शत की व्रद्धि कर दी है, जिससे किसानों के लिए बिजली बिल भरना भी मुश्किल हो गया है, इसके लिए भी संघर्ष करना पडेगाI
(डॉ. कन्‍हैयालाल सिहाग, किसान नेता)

किसानों को फसल का उचित भाव नहीं मिलेगा, तब तक किसान की आर्थिक हालात सुद्रढ नहीं होगी I
(हरिराम गोदारा, किसान चेतना मंच)