प्रमोद कुमार चमोली के व्यंग संग्रह ‘सेल्फियाए हुए हैं सारे’ का हुआ लोकार्पण

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नट साहित्य-संस्कृति संस्थान का त्रिदिवसीय साहित्य-समारोह प्रारंभ
चमोली के व्यंग 21वीं सदी के : डा.चारण व्यंग
हैलो बीकानेर। वरिष्ठ रंगनिर्देशक व समालोचक डॉ.अर्जुनदेव चारण ने कहा है कि खुद पर हंसना बहुत मुश्किल है और एक अच्छा व्यंज्यकार वही होता है जो खुद पर हंसे। साहित्य में समाज की बात की जाती है और व्यंग कार खुद को चरित्र बनाकर बात करता है।
डॉ.चारण ने यह उद्गार शुक्रवार को धरणीधर रंगमंच पर प्रमोद कुमार चमोली के व्यंग संग्रह ‘सेल्फियाए हुए हैं सारे’ के लोकार्पण समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि चमोली के व्यंज्य 21वीं सदी के व्यंज्य हैं और इस रूप में वे आज के समय के हरिशंकर परसाई और शरद जोशी हैं।
नट साहित्य संस्कृति संस्थान की ओर से आयोजित त्रिदिवसीय साहित्य-समारोह के पहले दिन आयोजित कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.मदन केवलिया ने कहा कि व्यंज्य विडम्बना का पर्दाफाश करने वाली विधा है। इंसान के मुक्तियुद्ध की सार्थकता व्यंज्य में है। यही सही है कि व्यंजना को समझना हरेक के वश की बात नहीं है लेकिन प्रमोद कुमार चमोली ने इस विधा में बहुत ही बेहतर काम किया है।
स्वागताध्यक्ष वरिष्ठ रंगकर्मी मधु आचार्य ने कहा कि हास्य और व्यंज्य के बीच के बारीक अंतर को समझे बगैर व्यंज्य को समझा नहीं जा सकत। हास्य हंसाता है जबकि व्यंज्य तिलमिलाता है। आपाधापी और स्वार्थपरता के इस समय में व्यंज्य ही साहित्य की एक ऐसी विधा है जो व्यक्ति को अपने अंदर झांकने के लिए विवश करती है।
इस मौके पर लेखक प्रमोद कुमार चमोली ने कहा कि आज का यह दौर जब जीवन ही व्यंज्य हो गया है, अगर कोई यह कहता है कि जी रहे हैं तो भी व्यंज्य हो जाता है, ऐसे समय में एक व्यंज्यकार के सामने चुनौती है कि वह कैसे व्यवस्था और समाज ही विसंगतियों को सामने लाए।
प्रारंभ में वरिष्ठ व्यंज्यकार बुलाकी शर्मा ने प्रमोद चमोली को नए तेवर वाला व्यंज्यकार बताया, जिन्होंने नए प्रतीकों के माध्यम से अपनी बात कही है। वरिष्ठ कवि-कथाकार राजेंद्र जोशी ने त्रिदिवसीय साहित्य-समारोह की जानकारी देेते हुए कहा कि गद्य साहित्य पर आधारित यह त्रिदिवसीय कार्यक्रम व्यंज्य और कहानी के नाम है।
कार्यक्रम का संचालन हरीश बी.शर्मा ने किया। आभार वरिष्ठ शायर आनंद वि.आचार्य ने जताया।
प्रस्थान बिंदु में आज कहानी पर चर्चा
15 अप्रैल को संस्थान की ओर से प्रारंभ किए गए कार्यक्रम ‘प्रस्थान-बिंदुÓ के तहत गांधी, पत्रकार कॉलोनी स्थित शिव-सागर में कहानी विधा पर केंद्रित चर्चा रखी गई है। शाम पांच बजे प्रारंभ होने वाले इस कार्यक्रम में हिंदी कहानी पर कहानीकार-उपन्यासकार नवनीत पांडे और राजस्थानी कहानी पर कवि-आलोचक डॉ.गौरीशंकर प्रजापत पत्रवाचन करेंगे।
‘महीन धागे का रिश्ता’ का लोकार्पण 16 को
16 अप्रैल को धरणीधर रंगमंच पर श्रीमती सीमा भाटी के कहानी संग्रह ‘महीन धागे से बुना रिश्ताÓ का लोकार्पण होगा। इस कहानी संग्रह को गायत्री प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। शाम साढ़े पांच बजे से प्रारंभ होने वाले इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मधु आचार्य ‘आशावादी’ करेंगे। मुख्य अतिथि श्री डूंगर महाविद्यालय में उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ.मोहम्मद हुसैन तथा विशिष्ट अतिथि राजस्थान राज्य अभिलेखागार के निदेशक डॉ.महेंद्र खडग़ावत होंगे। लोकार्पित कृति पर पत्रवाचन कवयित्री-कहानीकार श्रीमती ऋतु शर्मा करेंगी। कार्यक्रम का संचालन हरीश बी. शर्मा करेंगे।