राजस्थानी भाषा के लिए मनोहर मेवाड़ साहित्य का सम्मान बीकानेर के नीरज दइया को

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राजसमन्द,। राव मनोहरसिंह स्मृति न्यास आईडाणा एवं साकेत साहित्य संस्थान आमेट की ओर से कला साहित्य संस्कृति संगीत एवं पत्रकारिता में प्रतिवर्ष दिये जाने वाले नामों की घोषणा चयन समिति की अनुशंषा के आधार पर स्मृति न्यास के अध्यक्ष भगवतसिंह पारस ने की।
भगवतसिंह पारस ने बताया कि इस वर्ष का मनोहर मेवाड़ साहित्य सम्मान हिन्दी में श्री फतहलाल गुर्जर अनोखा कांकरोली, उर्दू में खुर्शीद अहमद शेख ‘खुर्शीद‘ उदयपुर, राजस्थानी में डॉ. नीरज दइया बीकानेर, संस्कृत में डॉ0 कुसुमलता टेलर उदयपुर, पत्रकारिता में भागीरथसिंह पत्रकारिता गौरव पुरुस्कार श्री गणपतलाल जाट संवाददाता आईडाणा को प्रदान किया जाएगा। चयन समिति में प्रकाश तातेड़, डॉ. श्रीकृष्ण जुगनु, माधव नागदा, विजय सिंह राव, ने साहित्यकारों का वरियता क्रम से चयन किया है।
सम्मान समारेाह समिति के संयोजक नारायणसिंह राव ने कहा कि सम्मानित होने वाले प्रतिभाओं को सात हजार एक सौ नकद एवं प्रशस्ति पत्र के साथ स्मृति चिह्न देकर दिसम्बर 2016 माह में आयोजित मेधा मिलन पर्व-6 में सम्मानित किया जाएगा।
इससे पूर्व साहित्यकार प्रकाश तातेड़, माधव नागदा, चतुर कोठारी, त्रिलोकी मोहन पुरोहित डॉ. श्रीकृष्ण जुगनु, डॉ. करुणा दशोरा, रीना मेनारिया, भेरु सिंह राव क्रान्ति, डॉ. बस्तीमल सोलंकी, डॉ. मुरलीधर कन्हैया व डॉ. शक्ति कुमार शर्मा को हिन्दी राजस्थानी एवं संस्कृत में उत्कृष्ट साहित्य सृजन, आयोजन एवं प्रकाशन के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों से सम्मानित किया जा चुका है।
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राजस्थानी साहित्य के लिए मनोहर मेवाड़ साहित्य सम्मान के विजेता डॉ. नीरज दइया को हाल ही में नानूराम संस्कर्ता साहित्य पुरस्कार की घोषणा हुई है। डॉ. दइया लंबे समय से साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं। 22 सितम्बर 1968 को रतनगढ़ (चूरू) में जल्में कवि-आलोचक डॉ. दइया ने ‘निर्मल वर्मा के कथा-साहित्य में आधुनिकता बोध’ विषय पर पीअेच.डी. की उपाधि प्राप्त की। आप माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान, अजमेर की राजस्थानी विषय पाठ्यक्रम समिति के संयोजक और राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की समितियों के सदस्य भी रहे। आपकी अनेक पुस्तके प्रकाशित हैं जिनमें प्रमुख है- लघुकथा-संग्रह ‘भोर सूं आथण तांई’ (1989), कविता-संग्रह ‘साख’ (1997), लांबी कविता ‘देसूंटो’ (2000), ‘पाछो कुण आसी’ (2015), समालोचना ‘आलोचना रै आंगणै’ (2011), ‘बिना हासलपाई’ (2014), बाल-कथा संग्रह ‘जादू रो पेन’(2012) और हिंदी कविता-संग्रै ‘उचटी हुई नींद’ (2013)। अनुवाद में : पंजाबी काव्य-संग्रह / अमृता प्रीतम ‘कागद अर कैनवास’ (2000), हिंदी कहाणी-संग्रह / निर्मल वर्मा ‘कागला अर काळो पाणी’ (2002), चौबीस भारतीय भाषाओं के कवियों की कविताओं का राजस्थानी अनुवाद ‘सबद नाद’ (2012), गुजराती यात्रा-वृत्तांत / भोलाभाई पटेल ‘देवां री घाटी’ (2013), नन्दकिशोर आचार्य की प्रतिनिधि कविताएं ‘ऊंडै अंधारै कठैई’ (2016), सुधीर सक्सेना की प्रतिनिधि कविताएं ‘अजेस ई रातो है अगूण’ (2016) और मोहन आलोक के पुरस्कृत राजस्थानी कविता-संग्रह का हिंदी अनुवाद ‘ग-गीत’ (2004)। संचयन एवं संपादन में : ‘मोहन आलोक री कहाणियां’ (2010), ‘कन्हैयालाल भाटी री कहाणियां’ (2011), राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर से प्रकाशित 55 युवा कवियों की कविताओं का संग्रह ‘मंडाण’ (2012)। डॉ. नीरज दइया को साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली से ‘बाल साहित्य पुरस्कार’, राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर से अनुवाद पुरस्कार’, नगर विकास न्यास से ‘पीथळ पद्य पुरस्कार’, रॉटरी क्लब बीकानेर आदि अनेक मान सम्मान मिल चुके हैं।