यूआईटी 90 ए और 90 बी के पट्टे की एन ओ सी करेंगे जारी

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बीकानेर, जयनारायण बिस्सा । बीकानेर नगर विकास न्यास में अनियमितता रोकने के लिए जल्द ही बायोमेट्रिक मशीन व कैमरे लगाये जायेंगे। यह घोषणा गुरुवार को आयोजित प्रेस-कॉन्फ्रेंस के दौरान नवनियुक्त यूआईटी चैयरमेन महावीर रांका ने की। प्रेस-वर्ताा को संबोधित करते हुए रांका ने बताया कि 90 ए और बी के पट्टे की एनओसी जल्द ही जारी की जायेगी। उन्होंने बताया कि इन फाइलों की एनओसी पिछले कई सालों से अटकी पड़ी थी। उन्होनें बताया कि इससे लगभग साढ़े सात हजार के करीब लोगों को फायदा मिलेगा। रांका ने बताया कि इस बाबत 23 नवम्बर को मुख्यमंत्री को प्रस्ताव बनाकर भेजा था। जिस पर बुधवार को स्वीकृति मिल गई। शेष रहे पट्टों जिसमें नियमन और कच्ची बस्ती को नियमन के बारे में फैसला बाद में लिया जायेगा। आगामी सप्ताह से इसके लिये प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। रांका ने बताया कि शहर के विकास के लिये न्यास अपनी जमीनों को बेचकर विकास कार्य करेंगा और उम्मीद है कि आगामी एक साल में सौ करोड़ की आय कर शहर के विकास को पंख लगायेंगे।
जोड़बीड़ जमीन का जल्द होगा फैसला…
जोड़बीड़ जमीन के बारे में हाईकोई ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि 31 जनवरी तक इस जमीन का फैसला करें। इस पर सरकार ने कमेटी बनाई है। इस कमेटी में सचिव नगर निगम, एडीएम बीकानेर, सहित चार अधिकारी शामिल है जो इसका निस्तारण करेंगे । प्रेस-वार्ता में चैयरमेन के अलावा विधायक गोपाल जोशी, शहर भाजपा जिलाध्यक्ष सत्यप्रकाश आचार्य, उपमहापौर अशोक आचार्य सहित कई भाजपा पदाधिकारी मौजूद थे।
सादुलगंज कच्ची बस्ती को नियमन करने की मांग….
सादुलगंज कच्ची बस्ती को नियमन करने की मांग को लेकर गुरुवार को सादुलगंज कच्ची बस्ती मौहल्ला कमेटी प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य किसान मोर्चा के अध्यक्ष ठॉ. नवरत्न सिंह सिसौदिया के नेतृत्व में यूआईटी चैयरमेन महावीर रांका को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में बताया कि सादुलगंज कच्ची बस्ती मौहल्ले में नायक, मेघवाल व मुस्लिम, जाट, राजपूत समुदाय सभी वर्ग के लोग निवास करते है। पूर्व सरकार में नगर विकास विभाग जयपुर द्वारा धारा 7 के तहत कच्ची बस्ती नियमन नीति वर्ष 2007 के अनुसार कच्ची बस्ती नियमन करने के आदेश जारी किये गये थे जिसकी पालना में सादुलगंज में मात्र 4 मकानों के पट्टे जारी किये गये थे। उन्होंने आग्रह किया है कि मौहल्ले वासियों की भावनाओं को समझते हुए बाकि रहे मकानों को भी नियमन करें।