विधार्थी समय का क्षण व अन का कण व्यर्थ नही खोये-प्रजापति

0



चूरू, जितेश सोनी ।रा.उ.मा. विधालय धीरासर के सभागार में शैक्षणिक मोटीवेशनल सेमीनार का आयोजन किया गया। संस्कारित शिक्षा वर्तमान की आवश्यकता, विषय के मुख्य वक्ता एडवोकेट रामेश्वर प्रजापति रामसरा सदस्य किशोर न्याय बोर्ड चूरू ने कहा कि बुजुर्गो के अतित के अनुभवो से हमें प्रेरणा लेनी चाहिये। छपने का अकाल ,टपकाली, कतारियो की लदान आदि की चर्चा करें तो हमें महसुंस होगा कि बुजुर्गो ने कितना अभाव ग्रस्त जिवनयापन कर आज हमें इस मुकाम पर पहुचाया है प्रजापति ने विधार्थीयो से कहा कि आपका जब भी पढाई में मन नहीं लगे तो घर में बुढे बुजुर्ग के हाथ पाव दबाकर पढने बैठ जाना , आपका पढाई में मन लग जाएगा। बुजुर्गो कि सेवा अंगे्रजी का सा पेपर है आप कितने ही सेवा करे आपको नम्बर कम ही मिलेगे लेकिन जब उनसे आत्मा से आर्शिवाद ले लोगे तो जिवन में आपको असफलता का मुंह देखना नही पढेगा। आप कम से कम हाथ कि हथेलिया व पैर कि पगथलियो के अंगुठे से एक्युपे्रसर तो कर ही सकते हो। इतिहास में श्रवण कुमार माता पिता कि सेवा के कारण आज घर घर याद किया जाता है। आज जब भी बात चलती है तो यह कहावत है कि अमुक का बैटा श्रवण है। उन्होने विधार्थियो से कहा कि शेक्षणिक विकास के लिए जब भी आपके थकान आये तो ध्यान योग करना चाहिये, थकान मिटाने व आंखो का आराम देने के लिए मनन से पढाई करनी चाहिये। उन्होने बारह गुना पढाई के फारमुले से नम्बे प्रतिशत अंक लाने का सरल तरीका बताते हुए पढाई में नियमित समय देकर निरन्तरता के साथ हिन्दी व अग्रेजी का शब्द कोष बढाने कि प्रेरणा दी।प्रजापति ने लिखकर याद करने के फायदे बताते हुए कहा कि हिन्दी से हिन्दी व अंग्रेजी से हिन्दी व हिन्दी से अग्रेजी तिनो डिक्शनरियो का उपयोग करना चाहिये, उन्होने जिला मुख्यालय स्थित जिला लाईबरेरी मे ंजाकर भी अध्यन करने कि शला दी। जिला लाईबरेरी के उपयोग से ही चूरू कि प्रथम बेटी मंजु राजपाल मात्र पांच साल लगातार लाईबरेरी में अध्यन से ही जिला कलक्टर बनने का अनोखा उदाहरण है। उन्होने छात्रो से लक्ष्य बनाकर , निर्णय समय पर लेकर अध्यन कि गहराई तक पहुचने कि सलाह दी। शाला प्रधान सिकन्दर खान ने विधार्थियो को कठोर प्ररिश्रम, समय प्रबंधन, अनुशासन से आगे बढने कि प्रेरणा दी। सोमदत गुरू ने कहा कि समय का क्षण व अन का कण विधार्थी को व्यर्थ नही खोना चाहिये। कार्यकम में बुधाराम जागीड़, सन्तोष पारीक, सुशिल कुमार, सावरमल प्रजापत, हिरालाल पूनिया, सहदेव सिंह, सुभीता न्योल, राजेश चैधरी, कृष्णा बुडानिया, ओकारमल, बंशीधर प्रजापत, आदि से सहभागिता दी। कार्यक्रम का संचालन हिरालाल फगेड़िया ने किया।