महिलाओं ने सदैव विश्व शांति की दिशा में रचनात्मक भूमिका निभाई : डॉ.मेघना शर्मा

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बीकानेर। नेशनल एसोसिएशन ऑफ साइकोलोगिकल साइंस, इंडिया एवं ग्लोबल हार्मनी नेटवर्क, गुजरात विद्या पीठ द्वारा अहमदाबाद स्थित अहिंसा शोध संस्थान की राष्ट्रीय संगोष्ठी में बीकानेर मूल की डॉ.मेघना शर्मा ने विश्व स्तर पर कामकाजी महिलाओं की मनोसामाजिक समस्याओं एवं संभावित समाधानों पर व्याख्यान दिया। इस दौरान डा.मेघना शर्मा ने कहा कि विश्व में अलग अलग राष्ट्रों की कामकाजी महिलाओं की समस्याओं को समझकर उनका समाधान सरकारी, संस्थागत और व्यक्तिगत सभी स्तर पर किया जाना आवश्यक है।
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क्योंकि महिलाओं ने सदैव विश्व शांति की दिशा में रचनात्मक भूमिका निभाई है और यह हमारे समाज ही नहीं वरन संपूर्ण मानव जाति के लिए एक विचारणीय मुद्दा है। डॉ. मेघना ने विशेषतौर पर भारतीय महिलाओं की समस्याओं के संदर्भ में मंच से बात की। कार्यक्रम का शुभारंभ शांति गीत से हुआ और उसी दौरान ग्लोबल पीस साइंस नामक संकलन का डॉ. सुरेन्द्र पाठक, रमेश कुमार, डॉ. पुष्पा मोटियानी द्वारा मंचासीन विभूतियों के साथ मंच से लोकार्पण किया गया। जिसमें विश्व के 56 राष्ट्रों के विचारकों के विश्व शांति संबंधित विचार सम्मिलित हैं। उद्धाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ.सुभाष चंद्र ने कहा कि आज मनुष्य मानसिक रूप से शांति से अधिक युद्ध के लिए तत्पर रहता है किंतु जबतक स्व शांति की परतों को नहीं खोला जाएगा तबतक विश्व शांति की बात करना बेमानी होगा। डॉ. चाँद भारद्वाज ने लोकार्पित संकलन का परिचय मंच से दिया।मुख्य अतिथि भावनगर विश्वविद्यालय के प्रो. विद्युत जोशी ने नर्मदा पुनर्वासन व प्रकृति के साथ मनुष्य जाति के संबंधों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि विश्व शांति तभी संभव है जब मनुष्य के मनोविज्ञान को नए सिरे से गढा जाए, इस विषय पर शोध व अध्ययन की गहन आवश्यकता है। इसी अवसर पर डॉ. मेघना शर्मा ने गुजरात विद्यापीठ के कुलपति प्रोफेसर डॉ. अनामिक भाई शाह से भेंट कर उन्हें अपने विचारों से अवगत करवाया व स्त्री विमर्श पर आधारित अपनी पुस्तक सेवेन फेसेट्स ऑफ वूमन पास्ट एण्ड प्रेजेंट भी भेंट की ।