सादुलपुर( मदन मोहन आचार्य)। ऐसे वक्त में जब नौकरशाही और लालफीताशाही का तिलिस्म व्यवस्था के सिर चढ़कर बोल रहा है और अफसरों की असंवेदनशीलता के चलते उस तिलिस्म को भेद पाना बड़े-बड़ों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी राजगढ़ सादुलपुर एसडीएम हिम्मत सिंह ने जनता के बीच जाकर काम करने की अपनी खास कार्यशैली और संवेदनशीलता के चलते आमजन में अपनी लोकप्रिय छवि बनाई है। दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक जाने वाले लोगों के लिए हिम्मत सिंह सच्चे हमदर्द बनकर उभरे हैं।

गौरतलब है कि एसडीएम हिम्मत सिंह राज्य सरकार की मंशा और निर्देशों के अनुरूप शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की जन सुनवाई तो कर ही रहे हैं, साथ ही साथ इन्होंने शहर में वार्डवार जन सुनवाई का कार्यक्रम शुरू किया है, जिससे वे समस्याओं व योजनाओं की वस्तुस्थिति को बेहतर ढंग से जान पाते हैं और उसका समुचित समाधान करवाते हैं। इनके पास अपनी समस्या लेकर आने वाला व्यक्ति निराश होकर नहीं लौटता है। काम यदि होने योग्य है तो वह इनके पास आने के बाद हुए बिना नहीं रहता और यदि किसी कारणवश कार्य होना संभव नहीं हो तो वे फरियादी को पूरी तरह संतुष्ट करके लौटाते हैं। उनकी इस कार्यशैली से अफसरों के प्रति आमजन का विश्वास बढ़ा है और लोगों को लगने लगा है कि इस बेदर्द व्यवस्था में कोई उनका भी हमदर्द है।

अपने रूटिन कामकाज के अलावा उनकी उपलब्धियो के आंकड़ों पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि इसी छह मार्च को कार्यग्रहण करने के बाद 30 जून तक चार महीने से भी कम समय में उन्होंने खाद्य सुरक्षा में नाम जोड़ने की अपीलों को डिसाइड करते हुए 1700 पात्रलोगों के नाम इस योजना में जुड़वाकर एक कीर्तिमान स्थापित किया है जबकि इसी दौरान लोकसभा चुनाव होने के कारण निर्वाचन दायित्वों का भी उनके द्वारा निष्ठा से पालन किया गया है। लोग बताते हैं कि एसडीएम हिम्मत सिंह क्षेत्रा के ग्रामीण अंचल मेें जाकर चौपाल पर बैठकर लोगों से बातचीत करते हैं और बात ही बात में निकलने वाली समस्याओं का यथासंभव मौके पर ही समाधान करते हैं। पानी, बिजली और स्वास्थ्य जैसी सेवाओं को प्राथमिकता से देखते हुए राज्य सरकार की उन योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को देते हैं, जिनका लाभ उन्हें मिल सकता हो।

एक प्रशासनिक अधिकारी की इस तरह की शैली से लोग खासे प्रभावित नजर आते हैं। लोगों का कहना है कि राजकीय सेवा से जुड़ा हर व्यक्ति अगर इस प्रकार संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ काम करने लग जाए तो शासन और प्रशासन की बिगड़ी छवि को कुछ ही समय में बदला जा सकता है।