सर्वाधिक निर्यात के लिए विकास डब्ल्यूएसपी लिमिटेड को मिला अवॉर्ड

हैलो बीकानेर न्यूज़/कलकत्ता। कलकत्ता के आईटीसी सोनार होटल में ‘शैलैक और वन उत्पाद निर्यात संवर्धन परिषद’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में श्रीगंगानगर की निर्यातक इकाई विकास डब्ल्यूएसपी लिमिटेड को सर्वाधिक निर्यात के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान विकास डब्ल्यूएसपी लिमिटेड के सीएमडी बी.डी. अग्रवाल एवं उपाध्यक्ष डॉ. संजय पारीक को स्वयं देश के केन्द्रीय वाणिज्य व उद्योग तथा नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु, सुमित घोष (चेयरमैन, शेफिक्सल) एवं  देबजनी रॉय (कार्यकारी निदेशक, शेफिक्सल) ने सौंपा तथा अवॉर्ड प्रदान करते हुए सुरेश प्रभु ने अग्रवाल को सर्वाधिक निर्यात के माध्यम से देश को बहुमूल्य विदेशी मुद्रा प्रदान के लिए धन्यवाद भी ज्ञापित किया।
वाणिज्य मंत्री ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में बी.डी. अग्रवाल की सराहना की और कहा कि ग्वार का उत्पादन और ग्वार गम का निर्यात बढ़ाने में इनका बहुत बड़ा योगदान है और ये बधाई के पात्र हैं। ज्ञात रहे कि विकास डब्ल्यूएसपी लिमिटेड को सर्वाधिक निर्यात के लिए वर्ष 1993-94 से वर्ष 2009-10 तक लगातार एपिडा (एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डिपार्टमेंट अथॉरिटी) द्वारा भी अवॉर्ड प्रदान किया जाता रहा है। शनिवार प्रात: 10 बजे आयोजित हुए इस कार्यक्रम में विकास डब्ल्यूएसपी लिमिटेड को वर्ष 2010-11 में 544.79 करोड़ रुपए का निर्यात कर द्वितीय स्थान, वर्ष 2011-12 में 889.18 करोड़ रुपए का निर्यात कर तृतीय स्थान एवं वर्ष 2012-13 में 2293.47 करोड़ रुपए का निर्यात कर पुन: द्वितीय स्थान प्राप्त करने के लिए अवॉर्ड प्रदान किया गया।
विकास डब्ल्यूएसपी लिमिटेड के ग्वार गम के क्षेत्र में विदेशों में किए गए हजारों करोड़ रुपए के निर्यात से ग्वार उत्पादक किसानों तथा उनसे जुड़े मजदूरों एवं व्यापारियों को भी भारी लाभ मिला है, जिससे किसान-मजदूर वर्ग की अभिजीत आय में अप्रत्याशित वृद्धि हुई तथा उनके जीवन में खुशहाली आई है। अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि उनकी कम्पनी द्वारा पिछले 18 वर्षों से लगातार किसानों को अच्छी गुणवत्ता के गुआर बीज मेघराज -600 उपलब्ध करवाकर ग्वार की फसल के उत्पादन में गंगानगर क्षेत्र में लगातार भारी इजाफा किया जाता रहा है, जिसका किसानों को सीधा लाभ मिला है।
उन्होंने बताया कि गुवार गम का इस्तेमाल आइसक्रीम, पेय पदार्थ, केक, ब्रेड, पेस्ट्री, सॉस, सलाद, अचार, चॉकलेट, जेली, बिस्कुट, कोको, सौन्र्दय क्रीम, लोशन, बालों के शैम्पू एवं कडिशनर, दंत मंजन, शेविंग क्रीम आदि सहित ग्वार गम अपने बहु-आयामी गुण जैसे जल कमी का नियन्त्रण, श्यानता नियन्त्रण, घर्षण में कमी व ड्रिल बिट्स को ठंडा करने के कारण तेल के कुएं खोदने में इसका प्रयोग होता है, जिसकी वजह से इसकी विदेशों में भारी मांग हमेशा बनी रहती है।
विकास डब्ल्यू एस पी कम्पनी बैकवर्ड तथा फारवर्ड इन्टीग्रेशन क्षेत्रों में अनुसंधान करके गुआर गम के नए उपयोग तलाश करती है जिससे विश्व व्यापी मांग में निरन्तर बढोतरी होती रही है। ग्वार के उत्पादन में भारत विश्व में अग्रणी है जो वैश्विक उत्पादन में लगभग 90 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। भारत में पारम्परिक रूप से ग्वार की खेती मुख्यत: राजस्थान, हरियाणा, गुजरात व पंजाब में की जाती है। पूरे भारत में होने वाली ग्वार की खेती का लगभग 90 फीसदी उत्पादन राजस्थान में होता है। इस वजह से राजस्थान भारत का अग्रणी ग्वार उत्पादक प्रदेश है।
ग्वार का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8550 रुपये प्रति किवंटल तय करने की मांग उठाई
अवॉर्ड वितरण कार्यक्रम के उपरांत सीएनएन सवांददाता द्वारा केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग तथा नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु से सवाल जवाब किये गए इसमें उपस्थित सभी अतिथियों ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में बी.डी. अग्रवाल ने सुरेश प्रभु के समक्ष अपने विचार रखते हुए।
ग्वार का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8550 रुपये प्रति क्विंटल तय करने तथा हाल ही में खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों में किये गए इजाफे को स्वामीनाथन आयोग द्वारा निर्धारित सी-2 फार्मूले के अनुसार नए सिरे से मूंग की फसल के 8550 रुपये प्रति क्विंटल तथा नरमा/कपास की फसल का 6564 रुपये प्रति क्विंटल भाव तय करने एवं किसानोंं की फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की पूर्ण व्यवस्था करने की अपील की, जिस पर सुरेश प्रभु ने बी.डी. अग्रवाल को आश्वस्त किया वे जल्द उनकी बात प्रधानमंत्री कार्यालय को भिजवाकर सरकार से इसके लिए अनुशंषा करेंगे।

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