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हाई कोर्ट के दो फैसलों ने सरकार को डाला दुविधा में, संघर्षरत बेरोजगारों की उम्मीदें फिर से हुईं जीवंत, गत भाजपा सरकार की भर्ती नीति से रह गए हजारों पद खाली

सादुलपुर,(मदनमोहन आचार्य): रीट भर्ती 2016 (नॉन टीएसपी) लेवल दो अंग्रेजी तथा संस्कृत शिक्षा विभाग तृतीय श्रेणी भर्ती 2018 लेवल दो विज्ञान गणित के संबंध में गत सप्ताह राजस्थान हाई कोर्ट जोधपुर ने दो महत्वपूर्ण फैसले सुनाये हैं। गत मंगलवार को एक ओर जहाँ हाई कोर्ट की डबल बेंच ने रीट भर्ती 2016(अंग्रेजी)के 4960 विज्ञापित पदों में से रिक्त सभी 826 पद तुरंत भरने का फैसला सुनाया है, वहीं हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने संस्कृत शिक्षा विभाग तृ.श्रे.भर्ती 2018 में विज्ञान गणित के 428 विज्ञापित पदों में से वर्तमान में रिक्त सभी 356 पदों को 15 दिन में भरने का आदेश पारित किया है।

उक्त फैसलों में हाई कोर्ट ने गत सरकार द्वारा इन भर्तियों में अपनाई गयी नियुक्ति प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाये हैं। साथ ही भर्ती की नोडल एजेंसियों द्वारा नियमों की गलत व्याख्या कर मेरिट सूचि तैयार करने तथा विभिन्न नियमों की आड़ में विज्ञापित पदों को खाली रखने पर कठोर टिप्पणियां करते हुए पुन: नियुक्ति प्रक्रिया शुरु करने के आदेश दिए हैं।

हाई कोर्ट ने इन भर्तियों के अंतिम पद भरने तक भर्ती प्रक्रिया जारी रखने का आदेश फरमाया है, साथ ही वेटिंग लिस्ट व कार्मिक विभाग के नियमों की गलत व्याख्या करने पर भर्ती विभागों को फटकार भी लगाई है। हाई कोर्ट के इन दोनों फैसलों से जहाँ नियुक्ति से वँचित संघर्षरत हजारों पात्र बेरोजगारों की उम्मीदें फिर से जीवंत हो गयीं हैं, वहीं दूसरी ओर इन खाली पदों को नयी भर्ती में शामिल करने की तैयारी कर चुकी वर्तमान सरकार को दुविधा में डाल दिया है।

इनका कहना है कि:-
– प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय व संस्कृत शिक्षा निदेशालय ने उक्त दोनों भर्तियों में भर्ती नियमों की गलत व्याख्या की। कोर्ट के दोनों फैसले भविष्य में नजीर का काम करेंगे।


-एडवोकेट सुशील बिश्नोई (बेरोजगारों के वकील)

– रीट की विभिन्न भर्तियों में हजारों पद खाली हैं। पात्र बेरोजगार इन भर्तियों में सफलता हेतु आवेदन फार्म, कोचिंग एवं परीक्षा तैयारी में समय तथा काफी पैसा खर्च कर चुके थे। उम्मीद है कि हाई कोर्ट के फैसले के मद्देनजर बेरोजगारों के प्रति समर्पित वर्तमान सरकार सकारात्मक रवैया अपनाकर नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त करेगी।


-वेदपाल धानोठी (बेरोजगारों के लिए संघर्षरत)