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हैलो बीकानेर न्यूज़, www.hellobikaner.com, चेन्नई। अगले कुछ दिनों में अंतरिक्ष की उड़ान भरने वाला भारत का पहला सौर अन्वेषण मिशन ‘आदित्य-एल1 उपग्रह’ सूर्य का व्यवस्थित अध्ययन करने के लिए सात वैज्ञानिक पेलोड ले जाएगा। खास बात यह है कि यह सभी पेलोड देश की ही विभिन्न प्रयोगशालाओं में विकसित किये गये हैं।

 

 


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र (इसरो) ने कहा कि आदित्य-एल1 मिशन सूर्य का व्यवस्थित अध्ययन करने के लिए सात वैज्ञानिक पेलोड का एक सूट ले जायेगा।

 


इनमें सौर कोरोना और कोरोनल मास इजेक्शन की गतिशीलता का अध्ययन करने के लिए विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी), अल्ट्रा-वायलेट (यूवी) के निकट सौर प्रकाशमंडल और क्रोमोस्फीयर की तस्वीरें लेने तथा यूवी के निकट सौर विकिरण भिन्नता को भी मापने के लिए सौर अल्ट्रा-वायलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (एसयूआईटी) पेलोड है। जबकि सौर पवन और उनका ऊर्जा वितरण का अध्ययन करने के लिए आदित्य सोलर विंड पार्टिकल एक्सपेरिमेंट (एएसपीईएक्स) और प्लाज़्मा एनालाइज़र पैकेज फॉर आदित्य (पीएपीए)पेलोड हैं।

 

 


इसी तरह ऊर्जा रेंज में सूर्य से आने वाली एक्स-रे फ्लेयर्स का अध्ययन करने के लिए सोलर लो एनर्जी एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एसओएलइएक्सउस) और हाई एनर्जी एल-1 ऑर्बिटिंग एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर विस्तृत एक्स-रे हैं। अंतरग्रहीय चुंबकीय क्षेत्र को मापने के लिए सक्षम मैग्नेटोमीटर पेलोड लगा है।
आदित्य-एल1 के सभी वैज्ञानिक पेलोड देश में विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किए गए हैं।

 

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वीईएलसी उपकरण भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बैंगलोर में विकसित किया गया है, एसयूआईटी उपकरण इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स, पुणे में ,जबकि भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद ने एएसपीईएक्स उपकरण बनाया है जबकि अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने पीएपीए पेलोड विकसित किया है। सभी पेलोड इसरो के विभिन्न केंद्रों के निकट सहयोग से विकसित किए गए हैं।

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