बीकानेर में कला,साहित्य,संस्कृति के लिए समर्पण अनुकरणीय : ललित कुमार

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– टीम कथारंग ने की कार्यक्रम की समीक्षा, तय किए आगामी लक्ष्य
– जल्द ही कथारंग का बीकानेर संभाग का लघु-कहानी अंक प्रकाशित होगा
हैलो बीकानेर। कविता कोश के संस्थापक-संयोजक ललित कुमार ने कहा है कि बीकानेर जैसे शहर में कविताकोश या गद्यकोश जैसी परियोजनाएं अधिक सफलता से संचालित की जा सकती है, क्योंकि यहां पर साहित्य,कला,संस्कृति के लिए जिस तरह के समर्पित लोग हैं, दूसरी जगह कम देखने को मिले हैं। यह समय सूचना और ज्ञान का है और कविताकोश इन दोनों की भूख रखने वालों के लिए बनाया गया है। टीम-कथारंग के साथ बातचीत में ललित कुमार ने यह कहा। उन्होंने कहा कि कविताकोश और गद्यकोश को वैश्विक रूप से अपार समर्थन मिल रहा है लेकिन जब यह काम शुरू किया था तो सोचा नहीं था कि हम इतना कुछ कर पाएंगे। ऐसा ही मुझे कथारंग में नजर आ रहा है। कथारंग के माध्यम से बीकानेर में जिस तरह के प्रयोग या नवाचार किए जा रहे हैं, संभव है कि आने वाले समय में बीकानेर से अच्छे कहानीकारों की एक नई खेप निकले।
इस मौके पर कथारंग के कार्यक्रम की समीक्षा की गई और आगामी लक्ष्य भी तय किया गया। विधायक डॉ.गोपाल जोशी ने कहा कि समाज और साहित्य के आपस में गहरे सरोकार हैं, कविताकोश, गद्यकोश या कथारंग जैसे प्रयास इन सरोकारों से उपजे नवाचार हैं। समाज की नजर हमेशा नवाचारों पर लगी रहती है और अच्छे कार्यों को समाज की सराहना भी मिलती है। उन्होंने कहा कि टीम-कथारंग में जोश है, साहित्य की समृद्धि के लिए यह अच्छे संकेत है।
वरिष्ठ रंगकर्मी-पत्रकार मधु आचार्य ‘आशावादीÓ ने कहा कि बीकानेर बौद्धिक रूप से सजग और प्रगतिशील विचार वाले लोगों का शहर है जिनके संस्कार छूटे नहीं हैं। यहां साहित्य और साहित्यकारों को सदैव सम्मान मिला है और युवाओं में सदैव ही समर्पण का भाव रहा है। यही वजह है कि कथारंग जैसे कार्य समयबद्ध रूप से पूरे किए जा सकते हैं।
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स्काउट गाइड की प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ.विमला मेघवाल ने इस मौके पर कहा कि भावनाओं के जुड़ाव किसी भी सीमा को नहीं मानते हैं यही वजह है कि हम एक-दूसरे से सबंद्ध रहते हैं। उन्होंने कथारंग के कार्य के महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अगले अंक में एक कहानी देने का प्रयास करूंगी।
साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली से पुरस्कृत साहित्यकार बुलाकी शर्मा ने इस मौके पर कहा कि बीकानेर एक ऐसा शहर है जहां हर विचारधारा का सम्मान होता है क्योंकि व्यक्ति के रूप में हम सबसे पहले बीकानेरी हैं। कवि-आलोचक डॉ.नीरज दइया ने कविता कोश परियोजना के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इंटरनेट के माध्यम से राजस्थानी साहित्य को आगे लाने में इस वेब-पोर्टल का बहुत बड़ा योगदान है। कवि नवनीत पांडे ने कहा कि कविता कोश और गद्यकोश आज के संदर्भ में बहुत प्रासंगिक हो चुका है, किसी भी साहित्यकार के संबंध में जानकारी के लिए यह एक विश्वसनीय माध्यम है।
कवि-कथाकार राजेंद्र जोशी ने कहा कि साहित्य को जन तक पहुंचाने के लिए टीम-कथारंग ने जिस तरह से काम किया है, इस बात का विश्वास है कि आने वाले समय में समाज को साहित्य के क्षेत्र से और अधिक अच्छे परिणाम मिलेंगे।
रंगकर्मी-निर्देशक रामसहाय हर्ष ने कहा कि बीकानेर में अग्रज पीढ़ी द्वारा नई पीढ़ी को प्रेरित करने की एक स्वस्थ परंपरा है और इसी वजह से यहां की युवा पीढ़ी विकास के पथ पर अग्रसर है।
कवि नगेंद्र नारायण किराड़ृू ने कहा कि जब-जब राजनीति लडख़ड़ाती है, साहित्य उसे संभालता है। शायर इरशाद अजीज ने कहा कि सृजन का जो माहौल बीकानेर में है, उसकी वजह से ही कथारंग जैसे प्रयोग करने हा हौसला है। कवि-कहानीकार संजय आचार्य ‘वरुणÓ ने कहा कि कविता कोश के माध्यम से हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में लिखे जाने वाले साहित्य को वैश्विक मंच देकर साहित्यकारों को अंतरराष्ट्रीय बनाने का महती काम ललितकुमारजी ने किया है।
इस मौके पर अजीत राज, पवन शर्मा, आशीष पुरोहित, हैलो बीकानेर के संपादक राजेश ओझा, श्वेता,पेंटर धर्मा, शिवाजी आचार्य, मनोज ओझा, शिवशंकर रामावत, अहर्निश शर्मा ने भी विचार रखे। इस मौके पर टीम-कथारंग के साथियों को सम्मानित किया गया। हरीश बी.शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि हमारा आगामी लक्ष्य लघु-कहानी अंक प्रकाशित करना है। कथारंग के माध्यम से हम अधिकतम लेखकों तक पहुंचकर लघु-कहानियों का एक बड़ा संग्रह प्रकाशित करेंगे। इस बार भौगोलिक सीमा बीकानेर-संभाग रहेगी।