चौदह माह बाद हाईकोर्ट के आदेश पर राजगढ़ नगर पालिका की बैठक, सत्तापक्ष के सभी प्रस्ताव बहुमत के आधार पर खारिज

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हैलो बीकानेर न्यूज नेटवर्क, चूरू, मदनमोहन आचार्य, hellobikaner.com नगर पालिका राजगढ़ की 14 माह पश्चात हुई बैठक में चेयरमैन द्वारा रखे गए एक प्रस्ताव को छोड़कर सब को बहुमत से अस्वीकृत हो गए। सता पक्ष के लिए यह बैठ फैल साबित हुई। राजस्थान हाईकोर्ट के 5 दिसंबर 2022 की पालना के अंतर्गत यह मीटिंग चेयरमैन रजिया गहलोत की अध्यक्षता में हुई।

 

 

 

 

चैयरमैन के पक्ष में मात्र 13 15 पार्षद थे जबकि विरोध में 23 पार्षद रहे। नवंबर 2021 के बाद हुई बैठक में विधायक कृष्णा पूनियां भी उपस्थित थी मगर वह भी चेयरमैन यानी सत्तापक्ष का कोई बचाव नहीं कर सकी। बैठक कुल 38 पार्षद उपस्थित थे जिनमें से 23 पार्षद खिलाफ रहे। गहमागहमी के माहौल में बुलाई गई उक्त बैठक में नेता प्रतिपक्ष महेंद्र दिनोदिया ने एसडीएम से उपस्थित रहने का अनुरोध किया था।

 

 

 

एसडीएम रणजीत कुमार बिजारणिया बैठक में उपस्थित रहे। बैठक में विधायक ने यह भी कहा कि पार्षद बार-बार हाई कोर्ट भाग कर जाते हैं, जबकि काम तो नगरपालिका को करना है, कोर्ट काम नहीं करेगा। इस पर नेता प्रतिपक्ष महेंद्र दिनोदिया ने कहा कि हम लोग मजबूरी में हाईकोर्ट गए। जब साल भर में मीटिंग बुलाई नहीं जाए और नियमों की धज्जियां उड़ाई जाए तो कोर्ट के अलावा कोई चारा नहीं बचता। बैठक में प्रतिपक्षी पार्षदों द्वारा रखे गए प्रस्ताव को तो पारित कर दिया गया मगर चेयरमैन ने जो 26 प्रस्ताव रखे थे उसमें से एक प्रस्ताव को जनहित में विपक्षी दलों ने पारित कर दिया।

 

 

 

 

वह प्रस्ताव फायरमैन नियुक्ति से संबंधित था। इसके अलावा सभी 25 प्रस्तावों को बहुमत के आधार पर अस्वीकृत करवा दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष व पार्षदों ने बैठक में यह मांग की की नगर पालिका क्षेत्र में एक करोड़ 29 लाख रुपए के छह स्वागत द्वार बनाए जाने के कार्य आदेश निरस्त किया जाए।

 

 

 

इसके अलावा इस पर जो भी व्यय हो चुका है वह तत्कालीन ईओ सुमेर सिंह से वसूल किया जाए। आरोप लगाया गया कि मात्र एक टेंडर इस काम के लिए आया था उसके बावजूद 15 प्रतिशत अबोव रेट बजट पर टेंडर दे दिया गया जबकि ऐसा किया जाना बिल्कुल गलत है। इसके अलावा ईओ ने गलत तरीके से नियमों के विपरीत वर्क आर्डर जारी किए हैं।

 

 

 

उसे निरस्त करते हुए अब तक की व्यय राशि तात्कालिक अधिशासी अधिकारी से वसूल की जाए। स्टेडियम निर्माण के लिए मास्टर प्लान में संशोधन का प्रस्ताव बैठक में रखा गया उसे भी अस्वीकृत कर दिया गया। नगर पालिका ने मास्टर प्लान में संशोधन के लिए डीएलबी को सीधा प्रस्ताव भेजा था, जिसे डीएलबी ने यह कहते हुए लौटा दिया कि पहले इसे मंडल में पारित करवाया जाए मगर आज वह प्रस्ताव खारिज हो गया है।

 

 

 

हाईवे की सड़कों पर नगर पालिका द्वारा काम नहीं करवाया जा सकता इसके बावजूद सांखू  रोड रेलवे स्टेशन माता मंडी अंबेडकर सर्किल तक कार्य करवाए जाने के प्रस्ताव इस बैठक में चेयरमैन की ओर से रखे गए उसे भी अस्वीकृत कर दिया गया। बैठक में मेघवाल समाज, खटीक, प्रजापत बाल्मीकि समाज तथा व्यापारियान पंचायत के लिए सामुदायिक भवन बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया। इसके लिए किसी प्रकार का बजट अथवा एस्टीमेट प्रस्ताव में उल्लेखित नहीं था।

 

 

 

विपक्षी पार्षदों ने यह कहा कि इन भवनों के निर्माण के लिए विधायक कृष्णा पूनियां ने अपने कोटे से बनवाए जाने की घोषणा कर रखी है तो फिर पालिका क्यों बनवाने जा रही है और यदि बनाती है तो पहले नियमानुसार एस्टीमेट और बजट आगामी मीटिंग में रखा जाए, तब विचार किया जाएगा। इस प्रकार सत्तापक्ष के लिए यह बैठक गले की फांस साबित हुई है। बाल मंदिर डिग्गी की सफाई का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया।

 

 

 

इस पर प्रतिपक्ष के पार्षदों ने विरोध करते हुए कहा कि डेढ़ साल पहले 50 लाख रुपए डिग्गी सफाई पर तथा 25 लाख रुपए दीवार निर्माण पर व्यय किए गए थे। इस स्थिति में अब क्या आवश्यकता पड़ गई ? पहले भी दीवार निर्माण गलत तरीके से हुआ था तो फिर पालिका धन का दुरुपयोग क्यों किया जाए ?  इस बैठक में प्रतिपक्ष पार्षदों द्वारा 16 प्रस्ताव हाईकोर्ट आदेश की पालना में रखे गए थे जो सभी पारित हो गए हैं।

 

 

 

उनमें से मुख्य प्रस्ताव महाराणा प्रताप चौक के आसपास की पानी की निकासी के लिए एक करोड रुपए की वित्तीय स्वीकृति जारी करवाए जाने के साथ साथ अंबेडकर सर्किल से पंचमुखी बालाजी मंदिर तक वार्ड नंबर 1 में गंदे पानी की निकासी का प्रस्ताव पारित करवा दिया गया।

 

 

 

इसी प्रकार बस नवनिर्मित बस स्टैंड की दुकानों के संबंध में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि खुली बोली के जरिए दुकानों को किराए पर लगाया जाए और प्रति वर्ष किराया बढ़ाए जाने का विधिवत एग्रीमेंट किया जाए।  दुकानों को किसी भी स्थिति में विक्रय नहीं किया जाए यह प्रस्ताव भी पारित हो गया। बैठक में चेयरमैन बिल्कुल चुप बैठी रही जबकि प्रतिपक्ष के पार्षद गण जहीर अहमद, राहुल पारीक, राजेंद्र पटेल तथा महावीर बीकानेर भी विभिन्न विषयों पर चर्चा की तथा बहस में हिस्सा लिया।