इस सप्ताह की सुर्खियां: शहरी मिजाज और हेलमेट की अनिवार्यता, गोविंद मेघवाल क्यों रहे अलग-थलग
हरीश बी शर्मा
इस सप्ताह की सुर्खियां
हैलो बीकानेर। बीकानेर के पुलिस-प्रशासन ने एक बार फिर से अपने लिए हास्यास्पद स्थितियां खड़ी कर लीं हैं। बीकानेर में 16 जुलाई तक एक सघन अभियान चलाए जाने का आदेश जारी किया गया है।
इस अभियान के तहत बीकानेर में सघन यातायात जांच अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में गाडिय़ों के कागज आदि को जांच किये ही जाएंगे, साथ ही हेलमेट की अनिवार्यता पिछली सवारी पर भी लागू कर दी गई है। यानी, जिस शहर में बाइक चालक ही हेलमेट लगाने का अभ्यस्त नहीं है, उस शहर में बाइक के पीछे बैठने वाले को भी हेलमेट लगाना होगा।
पिछले तीन दशकों ने चले आ रहे 'सड़क सुरक्षा सप्ताह' के तहत भी जब बीकानेर में हेलमेट की सख्ती लागू नहीं हो पाई तो 16 जुलाई तक लोग कैसे हेलमेट लगाना शुरू कर देंगे। हो सकता है कि बीकानेर में हेलमेट को लेकर कुछ व्यावहारिक समस्याएं भी हों, लेकिन उन समस्याओं को दूर किया जा सकता है, लेकिन उस प्रवृत्ति का क्या कहें, जिसमें हेलमेट नहीं लगाने की जिद है। लिहाजा, शहर में पुराना ढर्रा ही जारी है। अखबारों में जब सख्ती की खबरें छपती हैं तो कार्रवाई करने वालों पर ही नहीं खबरें छापने वालों पर भी सवाल खड़े होते हैं।
इससे तो अच्छा है कि 'ऑपरेशन नीलकंठ' अभियान के तहत तस्करों पर की जाने वाली कार्रवाई में और तेजी लाई जाए। शहर के नौनिहालों को अगर नशे की गिरफ्त से बचा लिया जाएगा तो संभव है तेज रफ्तार वाहनों की गति भी संयमित हो जाएगी। सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। बहरहाल, बीकानेर को हेलमेट लगाना सिखाना है तो इससे पहले शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था, टूटी हुई सड़कें और ट्रैफिक लाइट सिस्टम को दुरुस्त करना होगा।
इस बीच पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगडऩे का सिलसिला जारी है। आइसीयू में प्रसूताओं का इलाज चल रहा है। एक प्रसूता के मृत बच्चा पैदा हुआ है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर लंबा आंदोलन चलाया, लेकिन बाद में बीकानेर आए कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की मध्यस्थता से धरना टाल दिया गया, लेकिन इस बीच गोविंद मेघवाल का प्रदर्शन जोशीला रहा।
सीमांत इलाकों में धार्मिक स्थल हटाने की कार्रवाई को लेकर कांग्रेसी नेता गोविंद मेघवाल के प्रदर्शन में कांग्रेस का न तो नेता था और न प्रचार सामग्री। कार्यकर्ताओं के हाथों में नीले झंडे जरूर देखे गए। गोविंद मेघवाल अपने लिए देहात कांग्रेस की वर्तमान कार्यकारिणी से अलग जमीन बनाना चाहते हैं। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि उनकी लड़ाई अर्जुनराम मेघवाल से है या बिशनाराम सियाग से? इस बीच पूर्व सांसद रामेश्वर डूडी की जंयती पर भी राजनीतिक कयासबाजियां होती रहीं।
भाजपा के नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार है। भाजपा की शहर अध्यक्ष सुमन छाजेड़ अभी भी गंगाशहर से बाहर नहीं निकल पाई हैं। यह तो अच्छा है कि सत्ताधारी संगठन है, वरना हालात ऐसे हैं कि संगठन बिखर जाता। नगर विधायक जेठानंद व्यास का जन्मदिन भी शहर ने सोशल मीडिया पर मनाकर अपने विधायक के प्रति भरोसा दिखाया तो दूसरी ओर पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला बीकानेर विधानसभा पश्चिम में अपनी जमीन संभालने में लगे हुए हैं।
डीएलबी ने एक बार फिर से आदेश निकालें हैं कि सफाईकर्मियों से सिर्फ शहर की सफाई के अलावा कोई भी काम नहीं लिया जाए। इस तरह के आदेश हर बार आते हैं। हर बार ऐसे सफाईकर्मी जिन्हें सरकारी कोठियों पर कामकाज के लिए भेजा जाता है। नगर निगम में ये सिर्फ तनख्वाह लेने आते हैं।
समान नागरिक संहिता लागू करने की मंशा के चलते बीकानेर में भी जगह-जगह से फीडबैक लिए जा रहे हैं। इस बीच लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे एक व्यक्ति की हत्या का आरोप उसी की पार्टनर पर है, मामला श्रीडूंगरगढ़ का है। सुजानदेसर में कालीमाता मंदिर के पास क्षेत्र में 11000 खेजड़ी के पौधे लगाए गए हैं। गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूलें शुरू हो गई हैं, लेकिन जर्जर इमारतों का खतरा बरकरार है। राज्यसभा में पहुंचे सतीश पूनिया बीकानेर में आकर छात्रों को संबोधित करके गये हैं।
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