HelloBikaner
BREAKING NEWS
• कोडमदेसर तालाब जीर्णोद्धार के कार्य में भक्तों की मेहनत रंग लाई • बीकानेर में बढ़ते सड़क हादसे: कब जागेगी जिम्मेदारी की चेतना? • गर्मी, संघर्ष और उम्मीद के बीच मुस्कुराता बीकानेर... • जाने आज के दिन की प्रमुख घटनाएं एवं विश्व इतिहास • ग्रामीण मजदूरी के आंकड़ों में सरकार कर रही है हेराफेरी : कांग्रेस • कोडमदेसर तालाब जीर्णोद्धार के कार्य में भक्तों की मेहनत रंग लाई • बीकानेर में बढ़ते सड़क हादसे: कब जागेगी जिम्मेदारी की चेतना? • गर्मी, संघर्ष और उम्मीद के बीच मुस्कुराता बीकानेर... • जाने आज के दिन की प्रमुख घटनाएं एवं विश्व इतिहास • ग्रामीण मजदूरी के आंकड़ों में सरकार कर रही है हेराफेरी : कांग्रेस

बीकानेर : हजारों गीतों के रचियता, कला के साधक गीत-संगीत सम्राट का कोचर हुआ निधन

nims
4 months ago
बीकानेर : हजारों गीतों के रचियता, कला के साधक गीत-संगीत सम्राट का कोचर हुआ निधन

हैलो बीकानेर न्यूज़ नेटवर्क, www.hellobikaner.com, बीकानेर। बीकानेर के जाने-माने गीत-संगीत सम्राट मगन कोचर का 74 वर्ष की आयु में शुक्रवार शाम करीब 4 बजे निधन हो गया है। उनकी अंतिम यात्रा कोचरों के चौक से गोगागेट स्थित श्मशान गृह ले जाई गई जहां उनके पुत्र उपेन्द्र व श्रेणित कोचर ने मुखाग्नि दी।

कोचर मंदिरात ट्रस्ट के जितेन्द्र कोचर ने बताया कि स्व. रिखबदास कोचर के सुपुत्र स्व. मगन कोचर ने जीवनभर निस्वार्थ भाव से कला की साधना करते हुए देशभर के कोने-कोने में अपने गीत-संगीत की प्रस्तुतियां दी।

हजारों गीतों के रचियता और लगभग हर साज (वाद्य यंत्र) पर स्व. कोचर की पकड़ थी। 2010 के चातुर्मास में गच्छाधिपति आचार्यश्री धर्मधुरंधरजी महाराज द्वारा स्व. मगन कोचर को गीत-संगीत सम्राट की उपाधि से नवाजा गया था। खास बात यह थी कि सर्वधर्म समभाव रखने वाले कोचर ने गुरु भक्ति के साथ ही बाबा रामदेव, भैरुनाथ बाबा, हनुमानजी और भोलेनाथ सहित अनेक देवी-देवताओं पर भी भजन लिखे और प्रस्तुतियां भी दी।

सामाजिक कार्यकर्ता सुरेन्द्र कोचर ने बताया कि स्व. मगन कोचर ने कभी भी किसी सम्मान या पुरस्कार को महत्व न देते हुए केवल संगीत की आराधना की। शास्त्रीयता की गहराई, लोक की सुगंध और भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति इन तीनों का सुंदर संगम उनके रचनात्मक कार्यों में स्पष्ट झलकता था। उनका संगीत केवल कानों तक सीमित नहीं रहता था, बल्कि सीधे हृदय को स्पर्श करता था।

उन्होंने अनेक शिष्यों को तैयार किया, जिन्हें केवल संगीत ही नहीं, बल्कि जीवन के मूल्यों की भी शिक्षा दी। व्यक्तिगत जीवन में वे अत्यंत सरल, विनम्र और आत्मिक रूप से समृद्ध थे। अहंकार उनसे कोसों दूर था। वे मानते थे कि कलाकार जितना बड़ा होता है, उसे उतना ही विनम्र होना चाहिए। यही कारण है कि वे सभी आयु वर्गों में समान रूप से सम्मानित और प्रिय थे। मगन कोचर का जाना एक अपूरणीय क्षति है। भले ही आज वे हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनका संगीत, उनके संस्कार और उनकी स्मृतियाँ सदा हमारे साथ रहेंगी।

Join for Latest News

हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ

Share: