लोककला हमारी संस्कृति की आत्मा है, जो ‘‘लोक का उजास’’ में धड़कती है - मालचन्द तिवाड़ी
हैलो बीकानेर न्यूज़, बीकानेर। प्रज्ञालय संस्थान, बीकानेर की ओर से वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा द्वारा संपादित पुस्तक ‘लोक का उजास’ का भव्य लोकार्पण समारोह धरणीधर रंगमंच में सम्पन्न हुआ। यह पुस्तक ख्याति प्राप्त वरिष्ठ लोककलाकार-संस्कृतिकर्मी मदनगोपाल व्यास ‘‘जैरी’’ के व्यक्तित्व व कृतित्व पर केन्द्रित है। लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार, आलोचक मालचन्द तिवाड़ी ने कहा कि लोककला हमारी संस्कृति की आत्मा है, जिसे मदन जैरी ने जीया है। उन्होने एक लोककलाकार के रूप में संस्कृति के विभिन्न आयामों को जन-जन तक पहँुचाने का उपक्रम किया है। कमल रंगा द्वारा संपादित यह पुस्तक केवल जीवनी ही नहीं अपितु बीकानेर की आधी सदी के सांस्कृतिक इतिहास का दस्तावेज है। इससे आने वाली पीढ़िया हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होगी।
समारोह अध्यक्ष अध्यात्मिक गुरू जुगल किशोर ओझा ‘‘पुजारी बाबा’’ ने कहा कि कला जब अध्यात्म से जुड़ती है तो लोकमंगलकारी बन जाती है। मदनगोपाल व्यास ‘‘जैरी’’ भक्ति और कला का सुन्दर संगम है। ऐसी विभूति पर पुस्तक संपादन करके कमल रंगा ने बीकानेर की संस्कृति का मान बढ़ाया है। समारोह में अपना सानिध्य देते हुए दाताश्री रामेश्वरानंद पुरोहित ने कहा कि मदनगोपाल व्यास ने अपनी वाणी से हमारी लोकसंस्कृति को जन-जन तक पहँुचाया है। कमल रंगा द्वारा संपादित यह पुस्तक आने वाली पीढ़ी के लिए एक सांस्कृतिक धरोहर होगी। समारोह में अपना सानिध्य प्रदान करते हुए ज्योतिषाचार्य राजेन्द्र किराड़ू ने कहा कि व्यास अपनी कला के प्रति ईमानदार है और यह पुस्तक उनके सांस्कृतिक जीवन का जीवंत उदाहरण है।
समारोह में पुस्तक संपादक वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि इस पुस्तक का संपादन करना एक सांस्कृतिक कर्म करने जैसा रहा। इसी क्रम में रंगा ने संपादन प्रक्रिया और मदनगोपाल व्यास के अवदान के साथ बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत को भी रेखांकित किया। प्रारम्भ में सभी का स्वागत करते हुए वरिष्ठ साहित्कार बुलाकी शर्मा ने संपादित पुस्तक को लोकसंस्कृति का दस्तावेज बताया एवं ऐसे सृजनात्मक कार्य हेतु कमल रंगा एवं मदनगोपाल व्यास ‘‘जैरी’’ को बधाई दी। पुस्तक का लोकार्पण मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया। उसके बाद युवा साहित्यकार विपल्व व्यास ने अपने पत्रवाचन के माध्यम से ‘लोक का उजास’ पुस्तक को महत्वपूर्ण बताते हुए लोक उपयोगी बताया।
इस भव्य लोकार्पण समारोह के सैकड़ो गणमान्य साक्षी रहे, जिनमें प्रमुख डाॅ. नृसिंह बिन्नाणी, राजेन्द्र जोशी, अविनाश व्यास, एडवोकेट गणेश व्यास, लोककलाकार गिरिराज व्यास, अबीर चंद, राजाराम स्वर्णकार, डाॅ. बाल नारायण पुरोहित, प्रमोद शर्मा, इन्द्र नारायण किराड़ू, शिव दाधीच, प्रेमनारायण व्यास, शिव कुमार शर्मा, बिठ्ठल हर्ष, गिरिराज भादाणी, राजेश रंगा, भवानी सिंह राठौड़, अशोक शर्मा, हरिनारायाण आचार्य, उमेश सिंह चैहना, महावीर स्वामी, आलोक जोशी, दिनेश व्यास, सुनील व्यास, एडवोकेट महावीर सांखला, सुरेन्द्र चांड़क, पुनीत कुमार रंगा, डाॅ. अजय जोशी, कासिम बीकानेरी, कैलास टाक, बाबु कटपीस, लक्ष्मण पुरोहित, राहुल आचार्य, कन्हैया लाल पंवार, किशन देराश्री, रामेश्वर सुथार, तोलाराम सारण, घनश्याम ओझा, नवनीत व्यास, पिन्टू जोशी आदि शामिल थे। समारोह का सफल संचालन वरिष्ठ उद्घोषक ज्योतिप्रकाश रंगा ने किया एवं सभी का आभार युवा कवि गिरिराज पारीक ने ज्ञापित किया।
Join for Latest News
हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ