इस सप्ताह की सुर्खियां: छाये रहे बी. डी. कल्ला, मेळे-मगरियों में चुनाव, मेडिसिन विंग में हंगामा, इंजेक्शन की कालाबाजारी
इस सप्ताह की सुर्खियां
हैलो बीकानेर। इस सप्ताह में सारी सुर्खियां डॉ. बी.डी. कल्ला बटोर ले गए। हालांकि, पिछले दिनों मेडिसिन विंग के उद्घाटन से ही वे चर्चा में रहे, लेकिन यह सप्ताह तो उनके ही नाम रहा हो जैसे। पहले एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे कहते हुए सुने गए कि उन्हें कमजोर किया जा रहा है। वायरल होते ही हंगामा।
कैसे ही करके 'दाबा-चीथीÓ हुई, लेकिन उसकी शामत आ गई, जिसके फोन से वीडियो समाज में गु्रप के वायरल हुआ। अभी यह मामला ठंडा हुआ ही था कि उनके परिवार वालों की नगर निगम चुनाव में दावेदारी को लेकर माहौल गरमा गया। फिर से अनिल कल्ला के नाम पर पानी फेर दिया गया।
डॉ. कल्ला ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनके परिवार से नगर निगम पार्षद का चुनाव कोई भी नहीं लड़ेगा। अनिल कल्ला के समर्थक इस बार उन्हें चुनाव मैदान में उतारने के लिए तैयार थे। इससे पहले अनिल शहर कांग्रेस के अध्यक्ष बनने की रेस में भी सबसे आगे थे।
बीकानेर के पाटों ने यह कयास लगाया कि डॉ. बी.डी. कल्ला अगला विधानसभा चुनाव भी लडऩा चाहते हैं, इसलिए कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। क्या पता कल अनिल कल्ला पार्षदी जीतकर मेयर की दावेदारी कर ले। कहा जा रहा है कि बीकानेर बोर्ड के कांग्रेसी होने की प्रबल संभावनाएं हैं। अगर ऐसा हो गया तो फिर टिकट मिला ही है।
सिर्फ यही नहीं, उनके सुर्खियों में रहने का एक बड़ा कारण कांग्रेस में टिकटों का बंटवारा भी है। बीकानेर शहर में वे निगम चुनावों में अकेले निर्णायक माने जा रहे हैं। देहात में तो गोविंद मेघवाल, वीरेंद बेनीवाल, बिशनाराम आदि काफी नाम हैं, लेकिन शहर की सरकार बनाने के लिए कांग्रेस में डॉ. बी.डी. कल्ला तय करेंगे कि किसे सिंबल मिलेगा तो भाजपा में इस बार अर्जुन मेघवाल के अलावा जेठानंद व्यास और कुछ-कुछ सिद्धिकुमारी का दखल भी रहेगा। सिद्धिकुमारी का कुछ-कुछ इसलिए कि उन्होंने जिस सीट पर हाथ रख दिया, वह तो उनके ही दिए नाम की होनी है।
लिहाजा, अस्सी वार्ड में भाजपा के दस गुना ज्यादा दावेदार हैं तो कांग्रेस के पांच गुना ज्यादा। भाजपा की शहर अध्यक्ष के पास इस सवाल का जवाब नहीं है कि प्रत्याशी की योग्यता क्या होगी। जिला प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि मेळे-मगरियों में चुनाव का मतदान प्रतिशत कैसे बढ़ेगा। 9 और 11 सितंबर को चुनाव है, इस दौरान काफी लोग रामदेवरा के रास्ते में होंगे। 13 सितंबर को रामदेवजी का मेला भरेगा। संभव है मतदान की तिथियों में कुछ रद्दोबदल हो, लेकिन बड़ी शिकायत वोटों के इधर-उधर होने की भी है। बताते हैं कि कड़ी एक्सरसाइज की गई है, किसने की जैसे सवाल सत्तापक्ष की तरफ ही इशारा करते हैं।
बहरहाल, मेडिसिन विंग में हंगामे की खबर ने वहां लगाए गए गार्ड्स के चाकचौबंद रहने की पोल खोल दी। हालांकि, हंगामा मरीज के परिजनों के दो पक्षों में हुआ, लेकिन कुछ देर के लिए तो घमासान मच गया। स्थितियों को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस बीच पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की मृत्यु में एक अनुपमा का नाम भी जुड़ गया है। अब तक लगातार 19 प्रसूताओं की मौत हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री के आने पर बीकानेर में चली सिटी बसों के घाटे में जाने की खबरें हैं।
जबकि बसें अभी तक पांच ही चल रही है। बीकानेर से निकलकर दिल्ली के बाजार में कैंसर के इंजेक्शन की कालाबाजारी का मामला खुला तो जांच तेज हो गई है, जांच में यह भी पता चलेगा कि यह कॉकस कब से कालाबाजारी कर रहा था। इस प्रकरण में 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच यह भी पता चला है कि जिस इंजेक्शन की कालाबाजारी की गई, उसमें उल्लेखित दवा की जगह कुछ और ही था।
स्कूलों में अव्यवस्थाओं की आ रही खबरों के बीच बीकानेर के सैनिक स्कूल से भी फरियादी बीकानेर कलेक्ट्रेट पहुंच गए, क्योंकि स्कूल में सैनिक स्कूल जैसी व्यवस्थाएं ही नहीं। बाकी, 'सावण बीकानेरÓ की उक्ति ने इस बार भी धोखा दिया है। बीकानेर का पूरा सावन बारिश की बजाय उमस भरे दिनों में बीत गया। हर व्यक्ति गरमी की शिकायत करता हुआ नजर आया, प्रत्युत्तर में भी सहमति ही मिली। ठीक वैसे ही जैसे चीनी की बढ़ी हुई कीमतों को सुनकर दूसरे ने भी हामी भरी, लेकिन यह भी कहा कि हम क्या ही कर सकते हैं? अतहर नफीस का शेर है...
ये धूप तो हर रुख से परेशान करेगी
क्यूं ढूंढ़ रहे हो किसी दीवार का साया
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