बीकानेर: नहीं रहे स्वाद के जादूगर धर्मेंद्र, अग्रवाल समाज ने खोया अपना एक कोहिनूर
बीकानेर
हैलो बीकानेर न्यूज़। अपने अनूठे अंदाज, रचनात्मक सोच, सामाजिक सरोकारों और स्वाद की दुनिया में अलग पहचान बनाने वाले धर्मेंद्र अग्रवाल का लंबी बीमारी के बाद आज निधन हो गया। उनके निधन की खबर से बीकानेर में शोक की लहर दौड़ गई। धर्मेंद्र अग्रवाल ने अपने अनूठे कार्यों और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से न केवल बीकानेर, बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई थी।

धर्मेंद्र अग्रवाल को लोग प्यार से “स्वाद का जादूगर” कहते थे। उन्होंने अपने जीवन में ऐसे कई अनूठे कार्य किए, जिन्हें देखकर हर कोई आश्चर्यचकित रह जाता था। उनके नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी उपलब्धियां दर्ज रहीं। उन्होंने 150 से अधिक प्रकार के गोलगप्पे, सबसे बड़ा समोसा, सबसे बड़ी आलू की टिक्की, सबसे बड़ी आइसक्रीम और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला सबसे बड़ा कागज का लिफाफा तैयार किया। इसके अलावा सबसे बड़ी फिनी बनाने का रिकॉर्ड भी उनके नाम रहा।

धर्मेंद्र अग्रवाल की खासियत केवल रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं थी। वह अपनी रचनात्मक सोच के माध्यम से सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों को भी लोगों तक पहुंचाते थे। जब भी देश के प्रधानमंत्री बीकानेर आते, उनसे पहले धर्मेंद्र अग्रवाल अपने अनूठे अंदाज में गोलगप्पों से स्वागत संदेश तैयार करते थे। उनके इन प्रयासों की शहर में खूब चर्चा होती थी।

देश के खिलाड़ियों द्वारा खेलों में 100 से अधिक पदक जीतने पर भी उन्होंने गोलगप्पों के माध्यम से बधाई संदेश लिखकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया था। ऑपरेशन सिंदूर की विजय के अवसर पर भी उन्होंने गोलगप्पों के माध्यम से विशेष सेलिब्रेशन कर देश की विजय और वीर जवानों के सम्मान का संदेश दिया था। उनका यह अनूठा अंदाज लोगों के बीच खासा चर्चित रहा।

नए वर्ष के आगमन से लेकर चुनाव जागरूकता जैसे सामाजिक अभियानों तक, वह हर अवसर पर अपनी रचनात्मकता के साथ सक्रिय नजर आते थे। धर्मेंद्र अग्रवाल सामान्य चीजों को भी अपनी कल्पना और मेहनत से असाधारण बना देने की कला रखते थे। गोलगप्पे उनके लिए सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं थे, बल्कि उनके लिए वह सामाजिक संदेश और रचनात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम भी थे। यही वजह थी कि उन्होंने बीकानेर में अपनी ऐसी पहचान बनाई, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।
उनके निधन की खबर फैलते ही अग्रवाल समाज के सदस्यों, पत्रकारों, साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और शहर के अनेक लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि संदेशों का तांता लग गया। लोगों ने धर्मेंद्र अग्रवाल के साथ बिताए पलों को याद करते हुए उनकी उपलब्धियों और समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया।

अग्रवाल समाज ने अपना एक कोहिनूर खो दिया। समाज के लोगों का कहना है कि धर्मेंद्र अग्रवाल केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि अपनी अनूठी प्रतिभा, मिलनसार स्वभाव और रचनात्मक सोच के कारण समाज की एक अलग पहचान बन चुके थे। उनका निधन अग्रवाल समाज के साथ-साथ पूरे बीकानेर के लिए अपूरणीय क्षति है।
धर्मेंद्र अग्रवाल के जाने के बाद शहर में एक सवाल लगातार उठ रहा है—क्या धर्मेंद्र अग्रवाल की कमी कभी पूरी हो सकती है? इसका जवाब शायद आसान नहीं है। क्योंकि रिकॉर्ड बनाने वाले बहुत मिल सकते हैं, लेकिन अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता, सामाजिक सोच और अनूठे अंदाज से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाला धर्मेंद्र अग्रवाल जैसा व्यक्तित्व बार-बार नहीं मिलता।
उन्होंने यह साबित किया कि यदि सोच अलग हो, कुछ नया करने का जुनून हो और समाज के लिए कुछ करने की भावना हो तो साधारण चीजों से भी असाधारण पहचान बनाई जा सकती है। उनके बनाए रिकॉर्ड, उनके अनूठे संदेश और लोगों के बीच उनकी यादें हमेशा जीवित रहेंगी।
बीकानेर ने आज स्वाद की दुनिया के एक जादूगर को खो दिया और अग्रवाल समाज ने अपना एक कोहिनूर खो दिया। उनकी कमी निश्चित रूप से लंबे समय तक महसूस की जाएगी। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें। शोकाकुल परिवार एवं समाज के सभी सदस्यों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।
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