इस सप्ताह की सुर्खियां: घर-घर नशा, देश का युवा गाफिल, पिता के हत्यारे को गांव वालों ने धरदबोचा
हरीश बी शर्मा
इस सप्ताह की सुर्खियां
हैलो बीकानेर।बीकानेर में चलाए जा रहे 'ऑपरेशन नीलकंठÓ ने भले ही नशे के सौदागरों की कमर तोड़ दी हो, लेकिन इस दौरान जिस तरह के सबूत सामने आएं हैं, वे यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि नशे के सौदागरों ने किस तरह से बीकानेर को अपनी गिरफ्त में ले रखा है।
पाकिस्तान से सीधे संपर्क है। पिछले कुछ ही समय में ड्रोन पहुंचा रहे थे नशा ड्रोन-ड्रोपिंग के जरिये पाकिस्तान से बीकानेर आने के सबूत मिले हैं। एक ही इलाके में घर-घर नशा बिकने की पुष्टि होना इस बात का प्रमाण है कि लाखों के फायदे के इस खेल में समाज का कितना बड़ा नुकसान हो चुका है।
हालात यह है कि नशे का कारोबार गांवों तक फैल चुका है। युवा पीढ़ी नशे में गाफिल हो रही है। यह पीढ़ी अगर सरकार और व्यवस्था को गालियां निकालते हुए दिल्ली की सड़कों पर देखी जा सकती है तो कहीं इसकी वजह नशा तो नहीं, जिसने सम्मान, शिष्टाचार और रिश्तों को ताक पर रख दिया है। कोई बड़ी बात नहीं अगर देश के हर शहर में नशे के इन सौदागरों ने अपना रैकेट बना रखा हो।
बीते सप्ताह एक नवदंपत्ति की दर्दनाक मौत बडेरण के जोहड़ में डूबने से हो गई। अपनी नवब्याहता सुलोचना को बचाने के लिए गये सांवतराम की भी डूबने से मौत हो गई। सुलोचना पानी भरने जोहड़ की तरफ गई थी और उसका पैर फिसल गया। इसी दिन पोकरण में भी दंपत्ति के डूबने का हादसा हुआ।
हालांकि, इसे आत्महत्या माना गया। कई बार एक ही तरह की घटनाएं एक ही दिन अलग-अलग जगह होती है तो सवाल तो बनता ही है। नोखा के जांगलू गांव में पिता की जान लेने वाले राजाराम को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पिता की हत्या कर भागने की फिराक में राजाराम गांव वालों से बच नहीं पाया। पिछले दिनों चोरी की बढ़ रही वारदातों के बीच पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए नागौर के महेश सुथार को धर-दबोचा है। आरोप है कि इसने नोखा क्षेत्र में कई जगह पर चोरियां की। बीकानेर में भी पिछले दिनों चोरियों की वारदातें बढ़ी हैं।
पिछले दिनों कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ तो बीकानेर में कांग्रेसजनों ने विजय जुलूस निकाला। गांधी पार्क में नीट की परीक्षा रद्द होने पर आत्महत्या करने वाले छात्र-छात्राओं को श्रद्धांजलि देने के बाद गांधी पार्क से अंबेडकर सर्किल तक जुलूस निकाला गया। इससे पहले पूर्व मंत्री डॉ. बी. डी.कल्ला ने इस विषय पर प्रेस कांफ्रेंस भी की। इसी दौरान पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल पंचायत चुनावों की तैयारी मेंं लगे दिखाई दिए। पूगल में उन्होंने प्रदर्शन कर सीमा क्षेत्र के घरों और धार्मिंक स्थलों को हटाने का विरोध किया। गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग पर प्रदर्शन किया गया।
बज्जू के तेजपुरा में जाति पंचायत के एक फैसले ने भाइयों की आफत बढ़ा दी है। इन भाइयों का आरोप है कि उनकी बहन के लिव-इन जाने से उनके लिए यह फरमान सुनाया गया है। जाति पंचायत और खांप पंचायतों का प्रभाव अनेक समाजों पर आज भी है। इस तरह के मामलों में सजा और जुर्माने का सामाजिक प्रावधान भी है। खासतौर से तब जबकि राजस्थान सरकार भी समान नागरिक संहिता लागू करते हुए लिव-इन रिलेशन को भी रजिस्टर्ड करने की तैयारी कर रही है, इस तरह के फैसले देने वालों पर क्या कार्रवाई होगी, स्पष्ट होना चाहिए।
सावन आ चुका है, लेकिन बीकानेर में मानसून की बेरुखी ही चल रही है। मौसम विभाग की भविष्यवाणियों को मानते हुए बादल तो आते हैं, लेकिन बरसते कम ही हैं। एक दिन हुई बारिश ने ही हालात बिगाड़ दिए। बिजली के तार की चपेट में आने से युवक आनंद ओझा की दर्दनाक मौत भी इसी बारिश के खाते में गई। हालांकि, विद्युत व्यवस्था में सुधार के लिए रोज-रोज के शटडाउन लेने वाली बिजली कंपनी ने इन तारों को कब कसा था, यह सवाल भी अनुत्तरित है।
इस बीच सरकार ने तय किया है कि इस बार स्वतंत्रता दिवस बीकानेर में मनाया जाएगा। सरकार आएगी तो हो सकता है शहर के विकास पर भी बात हो, सड़कों की दशा में सुधार हो। एक बार पहले भी जब सरकार बीकानेर आई थी तो बजट भी अतिरिक्त मिला था, लेकिन सारा बजट सरकार के जाने के कुछ ही दिनों बाद पानी में बह गया।
कौन आएगा यहां कोई न आया होगा
मेरा दरवाजा हवाओं ने हिलाया होगा
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