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बीकानेर को मिला नया मेयर: पूर्व मंत्री बी.डी. कल्ला के भतीजे अनिल को मिली शहर की कमान, बीकानेर पश्चिम में होली और दीपावली

13 hours ago
पूर्व मंत्री बी.डी. कल्ला के भतीजे अनिल को मिली शहर की कमान, बीकानेर पश्चिम में होली और दीपावली

बीकानेर को मिला नया मेयर

बीकानेर।  बीकानेर नगर निगम के नए महापौर (मेयर) कांग्रेस पार्टी के अनिल कल्ला बने हैं। आज, 21 सितंबर को हुए मतदान और उसके तुरंत बाद हुई मतगणना के बाद आधिकारिक नतीजे सामने आ गए हैं। इस मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी अनिल कल्ला को कुल 50 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट प्राप्त हुए। 80 सदस्यीय बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के पास खुद के 42 पार्षद थे (बहुमत के लिए 41 चाहिए थे). लेकिन अनिल कल्ला ने निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करते हुए 50 वोटों के साथ एकतरफा व मजबूत जीत दर्ज की है। वे पूर्व कद्दावर मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के भतीजे हैं और बीकानेर नगर निगम के पांचवें महापौर चुने गए हैं।

 

 

कौन हैं बीकानेर के नए मेयर अनिल कल्ला?
अनिल कल्ला बीकानेर नगर निगम के नवनिर्वाचित महापौर (मेयर) हैं। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक वरिष्ठ और जमीनी राजनेता हैं। 21 सितंबर 2026 को हुए नगरीय निकाय चुनाव में उन्होंने भाजपा के सुरेन्द्र सिंह शेखावत को 50 बनाम 30 वोटों के बड़े अंतर से हराकर बीकानेर के पांचवें महापौर के रूप में कमान संभाली है।
अपनी इसी साफ-सुथरी छवि, लंबे राजनीतिक अनुभव और मजबूत पारिवारिक पकड़ के कारण वे बीकानेर में कांग्रेस के पार्षदों और निर्दलीयों को एकजुट कर शहर के नए मुखिया बनने में कामयाब रहे। 80 सदस्यों वाले बीकानेर नगर निगम के सदन में इस बार का मुकाबला सिर्फ वोटों की गिनती तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह राजनीतिक कौशल, विधायकों के रणनीति प्रबंधन और बाड़ाबंदी के कड़े पहरे की परीक्षा भी थी। पार्षदों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) और विरोधी गुट की ओर से की जाने वाली संभावित सेंधमारी से बचाने के लिए दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों और नवनिर्वाचित पार्षदों की कड़ी बाड़ाबंदी कर रखी थी।

 

 

 

बाड़ाबंदी से सीधे म्यूनिसिपल सभागार पहुंचे पार्षद
बीकानेर नगर निगम चुनाव के परिणाम आने के तुरंत बाद से ही बीजेपी और कांग्रेस ने अपने-अपने समर्थक पार्षदों को शहर से दूर सुरक्षा घेरे में भेज दिया था। हालांकि कांग्रेस के पास बहुमत है, लेकिन कांग्रेस के अंदरूनी गुटबाजी और बगावती तेवरों (जैसे नवरतन डागा द्वारा अलग तेवर दिखाए जाने) की वजह से बीजेपी को गुप्त मतदान में क्रॉस वोटिंग की उम्मीद नजर आ रही है। इसी वजह से 10 निर्दलीय और 1 आरएलपी पार्षद का वोट भी बेहद कीमती हो गया था।

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