इस सप्ताह की सुर्खियां: क्या स्थानीय स्वाधीनता सेनानियों को याद करेगी सरकार, मेडिसिन विंग जैसा फार्मूला सब जगह लागू हो
हरीश बी शर्मा
इस सप्ताह की सुर्खियां
हैलो बीकानेर। आजादी का अस्सीवां साल इस बार बीकानेर में राज्य स्तरीय समारोह के साथ मनाया जाना है, लेकिन क्या इस जश्न में बीकानेर के स्वाधीनता सेनानियों को याद किया जाएगा? क्या कलेक्ट्रेट के ठीक सामने कर्मचारी मैदान के बगल में एक छोटे से ब्लॉक में खड़े शिलालेख पर कोई एक गेंदे के फूल की माला भी चढ़ाने आएगा, जिस पर बीकानेर के स्वाधीनता सेनानियों का नाम उत्कीर्ण है।
इसे कभी शहीद पार्क भी कहा गया, लेकिन धीरे-धीरे भुला दिया गया, क्योंकि प्रशासन को इससे कोई सरोकार नहीं था और स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के पास इतने साधन-सुविधाएं कहां जो कार्यक्रम कर सके। सरकार को चाहिए कि किसी एक ब्लॉक में स्वतंत्रता सेनानियों की कहानी सुनाने का भी प्रबंध करे। स्टेट आर्काइव्ज में सभी सेनानियों की आवाज में उनकी कहानियां रिकार्ड कर रखी गई है, जरूरत है इन कहानियों को आम जन तक पहुंचाने की, लेकिन सरकार को समय कहां।
मुख्यमंत्री भजनलाल की अगवानी के लिए सारा तंत्र चाक-चौबंद है। भाजपा वाले काफी खुश हैं। नगर निगम चुनाव से पहले यह कार्यक्रम कार्यकर्ताओं को एक करने के लिए राजनीतिक अवसर साबित हो सकता है। परेशान हैं तो नौनिहाल, जिन्हें सुबह से लेकर दोपहर तक पीटी करवाई जा रही है ताकि मुख्यमंत्री के सामने प्रदर्शन हो सके।
मेडिसिन विंग को लोकार्पित करने का बड़ा मौका सरकार का है। अलबत्ता, डॉ. बी.डी. कल्ला ने एक प्रेस नोट जारी कर इस मेडिसिन विंग का क्रेडिट कांग्रेस सरकार को देने का प्रयास किया है, लेकिन सच तो यह है कि इसे बनाने में न तो कांग्रेस सरकार की भूमिका है और न भाजपा सरकार की, पता तो अब चलेगा कि यह चलती कैसे है। वैसे, सीएम मूंधड़ा चैरिटेबल ट्रस्ट ने इसे संचालित करने के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक कमेटी का जो फार्मूला लागू करवाया है, वह पायलट-प्रोजेक्ट साबित हो सकता है। समूचे पीबीएम अस्पताल में इस तरह की व्यवस्था लागू होनी चाहिए। एक अधिकारी तो चाहिये ही।
बहरहाल, पंचायत और नगर निगम चुनाव के लिए लॉटरी की तैयारी हो चुकी है। इसके लिए अधिसूचना भी जल्द ही जारी होनी है। दो संतान से ज्यादा होने पर चुनाव नहीं लड़ पाने का प्रावधान खत्म होने के बाद गांवों में बरसों से चुनाव लडऩे की हसरत पाले बैठे लोग तैयार हैं तो शहर में अस्सी वार्डों की लॉटरी का इंतजार है।
लूट के एक मामले में कस्टोडियन की गिरफ्तारी ने इस तरह का काम ईमानदारी से करने वालों को संदिग्ध बना दिया है। इससे पहले भी लूट के एक मामले में मुनीम ही मास्टरमाइंड निकला था। इस बार एटीएम में नोट भरने वाली वैन में लूट की वारदात के बाद तह तक पहुंचते-पहुंचते कस्टोडियन विक्रमसिंह राजपूत को पकड़ा गया है। ऑपरेशन नीलकंठ के माध्यम से चल रही कार्रवाई में राकेश प्रजापत का पुलिस के हत्थे चढऩा बड़ी सफलता मानी जा रही है।
पाकिस्तान से आने वाली ड्रग्स और हथियारों की खेप को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में राकेश की बड़ी भूमिका रही। संभव है और भी लोगों तक पुलिस पहुंचेगी। इस बीच एक नाटकीय घटनाक्रम में एसआई भर्ती का फर्जी प्रवेश पत्र लेकर बाहर आए मादक पदार्थ तस्करी के आरोपी संदेश का प्रकरण भी चर्चा में रहा।
लनकरणसर में हरिण शिकार के प्रकरण के बाद माहौल काफी गरमा गया। इस बीच बज्जू में भी वन्यजीवों के शिकार की घटना सामने आई है। श्रीडूंगरगढ़ में ट्रोमा सेंटर के लिए आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है।
सावन आधा जा चुका है, लेकिन अपेक्षाकृत दूसरे शहरों के बीकानेर का छांट-छिड़का सामान्य ही है। चातुर्मास के आयोजन जरूर हो रहे हैं और शिव मंदिरों में मेलों जैसा माहौल है। प्रशासन को चिंता है कि स्वाधीनता दिवस पर बारिश नहीं आ जाए। अगर ऐसा हुआ तो प्रबंध की पोल खुल जाएगी।
खेत खाली, गांव सूने शहर सुर्खियों से भरा
खुदा जाने किस तरह चलती यहां सरकार है
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