इस सप्ताह की सुर्खियां: कांग्रेस अनिल के लिए एकजुट- नसीम के लिए नहीं, अल्पसंख्यक नाराज, पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू
इस सप्ताह की सुर्खियां
हैलो बीकानेर। सूबे में पिछले दिनों शहर की सरकार बनाने की धुन चढ़ी रही। मैच आमने-सामने का ही रहा, लेकिन निर्दलीयों ने अपना महत्व जमकर दिखाया। सत्ताधारी भाजपा के 'अश्वमेघ यज्ञ का घोड़ा' बीकानेर में कांग्रेस ने रोका, लेकिन कांग्रेस की यह जीत, फिफ्टी-फिफ्टी में बंट गई। पहले दिन कांग्रेस का मेयर ने पचास वोट लेकर चुनाव जीता, लेकिन दूसरे दिन होने वाले डिप्टी-मेयर के चुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी हार गयी। यहां तक कि खुद के 42 वोट भी नहीं ले पायी। एक दिन पहले मेयर का चुनाव बुरी तरह हारने वाली भाजपा डिप्टी मेयर का चुनाव जीत गई। इस उलटफेर को लेकर जितने मुंह उतनी ही बातें हैं, लेकिन सबसे अधिक आहत है तो अल्पसंख्यक समाज, क्योंकि कांग्रेस ने डिप्टी मेयर के पद पर प्रत्याशी नसीम बानो को उतारा था, जिसे कांग्रेस के अपने 42 वोट भी नहीं मिले, 38 मत ही नसीम को मिल पाए। इसके बरअक्स पंकज गहलोत ने 40 वोट लिए। बचे हुए दो वोट में से एक नोटा को गया। दूसरा खारिज कर दिया गया।
इससे एक दिन पहले कांग्रेस ने भाजपा के प्रत्याशी सुरेंद्रसिंह शेखावत को पराजित करके मेयर पद पर अनिल कल्ला को निर्वाचित करवाया था, लेकिन एक ही दिन में इतना उलटफेर हो जाएगा, कांग्रेस ने भी नहीं सोचा था। बकौल मेयर अनिल कल्ला, 'शॉक्ड हूं।Ó
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अल्पसंख्यकों में इसका संदेश गलत जाएगा। एक दिन पहले कांग्रेस जहां उत्साह में थी और परंपरागत रूप से उपमहापौर की सीट अल्पसंख्यक समुदाय को देने के लिए तैयार थी, दे भी दी। दिक्कत यह हो गई कि मनोज बिश्नोई, छैलसिंह और सपना मारु के अलावा तीन प्रत्याशियों ने उपमहापौर का नामांकन भर दिया, जो अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं। अब्दुल वाहिद, जावेद परिहार, नसीम बानो के पर्चा भर जाने के बाद बड़े स्तर पर समझाइश के प्रयास हुए और आखिरकार नसीम को सिंबल मिल गया। लेकिन अंदरखाने की खबर यह है कि यह दूसरे दावेदारों को रास नहीं आया। उन्होंने नाम तो वापस लिया, लेकिन वोट नहीं दिया और इस बीच भाजपा ने चाक-चौबंद रणनीति ऐसी अपनाई कि कांग्रेस के खेमे से भी क्रास वोटिंग हो गई।
शुरू-शुरू में यह चुनाव एक तरफा लग रहा था। जैसे ही कांग्रेस को 42 सीट मिली और भाजपा को 27 सीटें तो यह लगने लगा था कि कांग्रेस बोर्ड बना लेगी, लेकिन अचानक से घूमी पूरे सूबे की राजनीति में रणनीतिकारों को सक्रिय कर दिया। बीकानेर से पार्षद का चुनाव जीतने वाले मकसूद अहमद को हाइकोर्ट सेे अपनी गिरफ्तारी रुकवानी पड़ी। मनोज बिश्नोई को पुलिस ने एक नोटिस भेज दिया। कांग्रेस के नेताओं ने भाजपा पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया, लेकिन बीकानेर में मेयर के चुनाव में प्रत्याशी अनिल कल्ला को मिले वोटों ने सभी को चौंका दिया कि जो दावे सुरेंद्रसिंह शेखावत के कैंप से हो रहे थे, उतने वोट भाजपा को कैसे नहीं मिले और पचास वोट लेकर अनिल कल्ला ने भाजपा के वोटों में सेंधमारी की या निर्दलीयों के वोटों से जीते।
डिप्टी-मेयर के चुनाव में भी यह यक्ष प्रश्न रहा कि पंकज गहलोत को चालीस वोट कहां से मिले? कयासों के तीर चलते रहे। देखना यह है कि यह बोर्ड बीकानेर के विकास के लिए अपनी भूमिका कितनी बेहतर निभा सकता है। ऐसी ही अपेक्षा पालिकाओं से है।
नोखा में विकास मंच ने अपना बोर्ड बना लिया, बजरंग सोनी अध्यक्ष निर्वाचित हुए, नारायण झंवर उपाध्यक्ष बने। देशनोक में कांग्रेस बोर्ड बनाने में सफल हुई, सरिता मूंधड़ा अध्यक्ष बनीं, ओमप्रकाश मूंधड़ा उपाध्यक्ष। भाजपा के खाजूवाला में मंगलसिंह-अनिता मीमानी, नापासर में संगीता नायक-माया इणखिया, श्रीडूंगरगढ़ में नारायण कलानी-विनोद गिरी, लूनकरणसर में चंद्रमोहन डाल-हनुमान नाथ अध्यक्ष- उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए।
बेशक, अंतिम रूप से परिणाम भाजपा के पक्ष में ज्यादा रहा है, लेकिन यह चुनाव शहरियों की मानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी के अलार्मिंग है, क्योंकि आने वाले दिनों में पंचायतों के चुनाव भी होने हैं। लॉटरी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हर समय चुनाव के लिए तैयार रहने वाली भाजपा के लिए राजस्थान में आने वाले ढाई साल काफी चुनौतीपूर्ण रहने हैं। मोहम्मद बेनजीर शाह का एक शे'र है।
हमारा इम्तिहां करते हो लेकिन
तुम्हारा भी इसी में इम्तिहां है
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