इस सप्ताह की सुर्खियां:: अब पीबीएम की हो सर्जरी, कल्ला फिर पुरजोर सक्रिय
हरीश बी शर्मा
इस सप्ताह की सुर्खियां:
हैलो बीकानेर। भ्रष्टाचार और गैर-जवाबदेही का केंद्र बनते जा रहे पीबीएम अस्पताल की दशा में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है। प्रकारांतर से कहें तो पीबीएम अस्पताल को अब एक अच्छी-खासी सर्जरी की आवश्यकता है ताकि इलाज हो सके। हर दिन इस अस्पताल को लेकर कोई न कोई मुद्दा रहता है। मरीजों का समय पर इलाज करने और उपलब्ध सुविधाओं का उपभोग मरीजों के हित में करने में अक्षम पीबीएम अस्पताल में भ्रष्टाचार के जिस तरह से 'ऑडिट पैरा' बन रहे हैं। वह दिन दूर नहीं जब यह तय करना कठिन हो जाएगा कि सुधार कहां से शुरू किया जाए।
पिछले दिनों प्रसूताओं की स्थिति बिगडऩे के बाद बने हालात पर पीबीएम अस्पताल के चिकित्सकों की तो छोडिय़े, जिस तरह से प्रदेश के चिकित्सा मंत्री ने कहा, उसके बाद संवेदनशीलता की उम्मीद करना ही बेमानी हो जाता है। परिणाम सामने है, प्रीति और शारदा नाम की दो प्रसूताओं की इलाज के दौरान मौत हो गई। डाक्टर्स ने अपनी रिपोर्ट में मरने के चिकित्सकीय कारण बता भी दिए, लेकिन परिवार उजड़ गए। शारदा का पति तो इतना विचलित हुआ कि अपनी पत्नी की मृत्यु के कारणों की जांच नहीं होने और जबरदस्ती पोस्टमार्टम करने के आरोपों के बीच खुद पर तेजाब उड़ेल लिया।
कांग्रेस इस मसले पर आक्रोशित है। संगठन लगातार धरने-प्रदर्शन कर रहा है। अलबत्ता, पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला धरने पर काफी दिन बाद पहुंचे। डॉ. कल्ला रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से मिलने भीड़ में पहुंचे, जहां उन्हें ध्यान से भी नहीं सुना गया। कल्ला का कोटगेट और सांखला रेल फाटक पर होने वाले निर्माण कार्य को लेकर एतराज है। उनका यह भी दावा है कि पैसा तो वही काम आ रहा है, जो कांग्रेस सरकार के शासन में पारित हुआ था। कल्ला की इस सक्रियता को देखते हुए लगता है कि वे इस बार भी विधानसभा चुनाव में किसी नए चेहरे को टिकट नहीं देंगे।
बहरहाल, बीकानेर के लालगढ़ से साबरमती एक्सप्रेस चल पड़ी है। अब कौन तो बताए कि बीकानेर वालों को जो रेल-गाडिय़ां चाहिये, वह चलाइये। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक रसगुल्ले में एक गाड़ी की बात कहकर सभी को हंसा तो दिया, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। अच्छा होता रेल विभाग बीकानेर से उदयपुर के लिए एक रेल चलाता। बीकानेर से उदयपुर के लिए प्रतिदिन चार बसें बीकानेर से चलती हैं। संभव है, रेल चलने से रेलवे को मुनाफा ही होता। अलबत्ता, अर्जुन मेघवाल अश्विनी वैष्णव से यह सब सुनकर फूले नहीं समाए।
बीता सप्ताह हादसों के नाम रहा। खासतौर से सड़क हादसे। कोडमदेसर जाते श्रद्धालुओं में दो की मृत्यु हो गई। गजनेर रोड पुल उतरते समय बाइक पर जा रही महिला किरण की मृत्यु का कारण बस से टक्कर बनी। श्रीडूंगरगढ़ के पास एक एक्सीडेंट हुआ। रिडमलसर पुरोहितान के रजाक समेजा और खारी चारणान के त्रिलोक की मौत पर सड़क दुर्घटना में हो गई। इन दुर्घटनाओं के दौरान घायलों को लेकर ट्रोमा सेंटर पहुंचे परिजनों की चिकित्सकों के साथ झड़प भी देखने को मिली।
बिजली कंपनी के विरुद्ध मोर्चा खोल चुके भगवानसिंह मेड़तिया की व्यवस्था से ठन गई लगती है। बिजली की कटौती के विरुद्ध पैदल मार्च करने और फिर पुलिस अधिकारी के साथ हॉट-टॉक करते हुए चर्चा में आए मेड़तिया के विरुद्ध दर्ज मामले में वकील तो विरोध कर रहे हैं, लेकिन भाजपा संगठन शांत है। संघ की पृष्ठभूमि वाले मेड़तिया ने खुलकर प्रदर्शन कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन भी किया।
महाजन में फायरिंग की घटना के बाद एकबारगी दहशत का माहौल है। 40 बीघा जमीन पर हरियाणा से कब्जा करने आए लोगों के फायरिंग करने से लोग भयभीत हो गए।बीकानेर की एक विवाहिता को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप गाजियाबाद की गुलबहार पर लगा है। लखनऊ में मिली विवाहिता ने अपने परिजनों के साथ वापस बीकानेर आने से इंकार कर दिया है। इस मामले के कई एंगल सामने आ रहे हैं। श्रीडूंगरगढ़ में लिव-इन में रह रही एक महिला की मृत्यु को हत्या बताते हुए पिता ने इस्तगासा दर्ज करवाया है। संयोग ही है कि प्रदेश में अब लिव-इन रिलेशनशिप भी रजिस्टर्ड होगी।
जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए गए कैंप फेल होते नजर आ रहे हैं, जैसे लोगों को कोई काम ही नहीं हैं। मनरेगा संविदाकर्मियों को नियमित करने का रास्ता साफ हो गया है, बीकानेर में भी कई लोगों को इसका लाभ मिलेगा। हालांकि, कई लोगों की नौकरी लगते ही रिटायरमेंट हो जाएगा। निर्जला एकादशी और मुहर्रम के दिन करीब आ रहे हैं। दोनों ही पर्व पास-पास आ रहे हैं और संयोग देखिये कि दोनों ही पर्वों में पानी का महत्व है।
न पूछ वक्त की इन बेजुबान किताबों से
सुनो जब अजान तो समझो कि हुसैन जिंदा है
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