इस सप्ताह की सुर्खियां: दिल्ली में ठगी, अधिकमास में गर्मी बेशुमार, मंत्रियों के किसिम-किसिम के बयान
हरीश बी शर्मा
इस सप्ताह की सुर्खियां
हैलो बीकानेर। दिल्ली में बीकानेर का एक वासुदेव चला गया ठगी करने। पकड़ा गया। पता चला है कि बीकानेर के पांचेक लोगों को भी अपने संग ले डूबा। जहां काम करता था, वहां से कैश ली और लूटपाट होने की दुहाई दी। कैश देने वालों का शक हुआ। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे तलाशे तो पता चला वासुदेव ने लूटपाट के दौरान कोई विरोध नहीं किया, अब फंस गये।
ठगी का यह मामला ताजा है, थोड़ा पुराना मामला तिरुपति मंदिर में देशी घी के नाम पर मिलावटी घी के इस्तेेमाल का, वहां से भी एक टीम बीकानेर आई है, क्योंकि घी यहां से थोक विक्रेता द्वारा सप्लाई किया गया था। और तो और नकली खाद-बीज के मामले में पिछले दिनों हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई में बीज निगम के निदेशक जुगलकिशोर को ही एसीबी ने धरदबोचा है। कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के खास कहे जाने वाले इस निदेशक को अब सरकार ने तो बर्खास्त कर दिया है, लेकिन जांच के घेरे में अभी काफी है। मीणा ने कह दिया है कि उनकी संलिप्तता का आरोप साबित हुआ तो इस्तीफा दे देंगे।
इस बीच यूडीएच मंत्री झाबरमल खर्रा ने एक थ्योरी ही खड़ी कर दी कि युद्ध की वजह से बीकानेर में विकास नहीं हो रहा है। वे गलत नहीं है, क्योंकि ऐसा हमने भी सुना है कि युद्ध से विध्वंश होता है, विनाश होता है, विकास नहीं होता, लेकिन खर्रा का कहना है डामर की सप्लाई रुकी हुई है। विकास हो तो कैसे, पता चला है कि अब डामर की कीमतों का निर्धारण भी रसोई गैस की तरह हर महीने होगा। पिछले दिनों चिकित्सा मंत्री गजेंद्रसिंह खींवसर बीकानेर आए थे, उन्होंने पीबीएम अस्पताल के कर्ता-धर्ताओं को निर्देश दिए थे कि ढर्रा बदलना चाहिए। नहीं बदला।
लैब में मारपीट की घटनाएं होती है। रेजीडेंट जब चाहे काम छोड़ देते हैं। सीनियर डॉक्टर कॉल पर भी नहीं आते। कहते हैं कि नये बने अधीक्षक और प्राचार्य पुरानी लॉबी से पटरी नहीं बिठा पा रहे हैं। कांग्रेस यहां हर दिन विरोध करती नजर आती है। भाजपा के नेताओं ने भी यहां मोर्चा बांध रखा है। नई बनी मेडिसिन विंग के हस्तांतरण का मसला अभी तक हल नहीं हुआ है और इस बीच प्रसूताओं को किडनी संबंधी बीमारियां होने की वजह से निजी अस्पतालों की 'पौ बारहÓ हो चुकी है। सही भी है कि सुरक्षित प्रसव का दावा करने वाली सरकार की अस्पतालों में किडनी का रोग लेने कौन ही जाएगा।
कुल मिलाकार सरकार के मंत्रियों के हाल सामने है, जनप्रतिनिधियों के हाल बेहाल हैं। यह जरूर है कि पिछले दिनों फिर से बयान देकर सुर्खियां बटोरने वाले अशोक गहलोत ने बी.डी.कल्ला का नाम लेकर एक बार फिर से कल्ला में ऊर्जा भर दी है। हालांकि, कल्ला अब गहलोत गुट में ही माने जाते हैं, क्योंकि बीकानेर में सचिन पायलट का एक ग्रुप आकार ले चुका है तो कल्ला को संभाले रखना गहलोत के लिए जरूरी है। ऐसे में अशोक गहलोत ने समय पर डॉ. बी.डी.कल्ला, डॉ.चंद्रभान, सीपी जोशी आदि का नाम लिया है जबकि यही कल्ला थे, जिनका टिकट यशपाल गहलोत के लिए काटकर बीकानेर में अफरातफरी मचा दी थी।
राजनीति की शह-मात ऐसी ही है। भाजपा वालों को मंत्रिमंडल के विस्तार का इंतजार है। बीकानेर को नशामुक्त बनाने का अभियान चल ही रहा है। मोबाइल चोरों तक पहुंचने में पुलिस कामयाब रही है। सुजानदेसर और वाल्मकी बस्ती में हुई आपसी लड़ाई की घटनाएं उल्लेखनीय रही हैं। यातायात पुलिस एक बार फिर से जांच में लग गई है। तीस जून तक यह अभियान चलेगा, जिसमें उस शहर में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों की धरपकड़ होगी, जहां के लोग यातायात नियमों की पालना करने के अभ्यस्त ही नहीं है। हर व्यक्ति से लेते रहो चाहे पैनल्टी। परेशान जनप्रतिनिधि हैं। पकड़े जाने पर नेता ही सहारा हैं।
अधिकमास के दौरान शहर में भागवत कथाओं का दौर है। जब चाहे आंधी उमड़ आती है। हालांकि अब वह काळी-कळायण वाला दौर नहीं रहा है, लेकिन धूल उड़ती है तो एक बारगी शहर भर जाता है। इस वजह से नौ तपा आधा तपा, लेकिन इसके बाद भी तपिश जारी है। आकाश जितना घुटता है, उतना बरसता नहीं है। फिर भी आसपास के कस्बों में हुई बारिश से आता ठंडी हवा का लहरका सुकून देता है।
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